अनार खाने के फायदे | Benefits of eating Pomegranate

अनार खाने के फायदे

अनार खाने के फायदे | Benefits of eating Pomegranate

अनार का फल मीठा, खट्टा और खट्टा-मीठा होता है। मीठा अनार त्रिदोषनाशक, तृप्तिदायक, वीर्यवर्धक, हल्का, ग्राही, स्निग्ध, बुद्धि की वृद्धि करने वाला और बलदायक होता है। यह प्यास, दाह, ज्वर, हृदय रोग तथा मुख की दुर्गंध दूर करता है। खट्टा अनार रुक्ष होता है, रक्तपित्त की वृद्धि करता है, वायु और कफ को मिटाता है तथा ठंडी प्रकृति वालों को हानि पहुंचाता है। खट्टा-मीठा अनार आमाशय को बलवान बनाता है, रुचिकर होता है, हृदय को आनंद देता है, वात-पित्त का नाश करता है, हल्का होता है तथा शीत प्रकृति वालों के प्रतिकूल रहता है। मीठे अनार में बेदाना ही सर्वोपरि माना गया है। इसके बीज मधुर, मृदु एवं रसदार होते हैं। इसका प्रयोग सामान्यतः खाने में ही किया जाता है। बेदाना अनार औषधि के निर्माण में प्रयुक्त नहीं होता। 

हैजा, मंदाग्नि, संग्रहणी, यकृत की दुर्बलता, बेचैनी, प्यास की तीव्रता तथा वायु विकार आदि में मीठा (बेदाना) अनार खाना हितकारी है। मूत्रल होने के कारण अनार अनेक मूत्र विकारों को दूर करता है। हृदय को शक्तिशाली बनाने, शरीर को मोटा करने तथा मूर्छा एवं खांसी को दूर करने के लिए अनार का सेवन करना चाहिए। यदि आमाशय में जलन हो एवं मूत्र करते समय अवरोध, वेदना या दाहकता हो, तो अनारदानों का शरबत बनाकर पीना चाहिए।

अनार से रोग का इलाज(pomegranate disease treatment)

पीलिया– मीठे अनार के दानों का पचास-साठ ग्राम रस रात को खुले स्थान में लोहे के पात्र में रख दें। प्रातःकाल उसमें उचित मात्रा में मिश्री मिलाकर पिएं। रोग-स्थिति के अनुसार एक-दो सप्ताह तक ऐसा करने से पीलिया दूर हो जाएगा।

अनार से रोग का इलाज

पेट दर्द- अनार के दानों में थोड़ा-सा सेंधा नमक तथा पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर खाने से पेट दर्द दूर हो जाता है। जिन लोगों के पेट में निरंतर दर्द रहता हो, वे कुछ दिनों तक लगातार इस विधि से अनारदानों का सेवन करें। इससे भूख खुलकर लगेगी और पेट दर्द दूर हो जाएगा। मीठे अनार के चालीस-पचास ग्राम दानों में पिसी काली मिर्च मिलाकर खाने से भी पेट दर्द दूर होता है। 

स्वप्नदोषलाल अनार का सूखा छिलका पीस-छानकर तीन-चार ग्राम प्रात: और सायं ताजे जल के साथ दो सप्ताह तक नियमित लेने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।

पायरियायदि मसूड़ों से रक्त निकलता हो, तो अनार के फूलों को छाया में सुखाकर महीन पीस लें। फिर उसे सुबह-शाम मंजन की भांति दांतों तथा मसूड़ों पर मलें। कुछ दिनों तक लगातार यह मंजन करने से पायरिया रोग ठीक हो जाता है। इससे हिलते हुए दांत भी मजबूत हो जाते हैं। 

बहुमूत्रमसाने में गरमी के कारण बार-बार पेशाब आने पर अनार के छिलकों को पीसकर चूर्ण बनाएं। इसका सेवन ताजे जल के साथ दिन में तीन बार करें।

नेत्रों की लालिमा –तांबे की एक कटोरी में अनार का रस भरकर आग पर चढ़ा दें। जब रस पककर गाढ़ा हो जाए, तब उसे जस्ते के पात्र में रख दें। रात को सोते समय इसे कांच की सलाई द्वारा आंखों में लगाने से आंखों और पलकों की खुजली, पलकों के बालों का गिरना तथा आंखों की लालिमा आदि नेत्र रोग दूर हो जाते हैं।

बवासीर- मीठे कंधारी अनार के छिलकों का पांच-छह ग्राम चूर्ण प्रात: और सायं ताजे जल के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। किन्तु इस समय गरम वस्तुओं का सेवन न करें और कब्ज आदि से बचें।

मुंह की दुर्गंध- मीठे अनार के छिलकों को पानी में उबालकर उससे कुल्ले करने पर मुंह एवं श्वास की दुर्गंध कुछ ही दिनों में पूरी तरह दूर हो जाती है।

खांसी– मीठे अनार के छिलकों के बीस ग्राम चूर्ण में पांच ग्राम लाहौरी नमक मिलाकर पानी के साथ लगभग पच्चीस गोलियां बना लें। एक-एक गोली दिन में तीन बार चूसने से खांसी ठीक हो जाती है। 

काली खांसी –जिस बच्चे को काली खांसी हो, उसे अनार का छिलका पड़ा दूध उबालकर कुछ दिनों तक पिलाएं। काली खांसी ठीक हो जाएगी।

पेचिश –अनार के पन्द्रह ग्राम सूखे छिलके और फूल वाली दो लौंग-दोनों को पीसकर एक गिलास पानी में अच्छी तरह उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो उसे छानकर तीन खुराक करके पिएं। दस्त और पेचिश में आराम हो जाएगा।

शरीर की गरमी –गरमी दूर करने में अनार का रस अद्वितीय है। यदि किसी कारणवश शरीर की गरमी सता रही हो, तो दिन में दो बार अनार का रस पिएं।

भोजन से अरुचि – एक चम्मच सिंका हुआ जीरा, रत्ती भर सिंकी हुई हींग, आधा चम्मच पिसी काली मिर्च, स्वादानुसार सेंधा नमक तथा सत्तर ग्राम अनारदाना-इन सबका चूर्ण बना लें। थोड़ा-सा चूर्ण सुबह चाटने से भोजन के प्रति अरुचि दूर होती है।

अम्लपित्त– अम्लपित्त, मिचली, उल्टी, हिचकी और प्यास आदि में अनार का रस लाभ पहुंचाता है। इससे रक्त की वृद्धि होती है, शरीर में शक्ति आती है तथा पाचन क्रिया सुधरती है। चेहरे पर लालिमा और आंखों में चमक आती है। 

मासिकधर्म- अनार के सूखे छिलकों का एक चम्मच चूर्ण ताजे जल के साथ दिन में दो बार सेवन करने से मासिकधर्म की अधिकता में कमी आ जाती है।

गंजापन –मीठे अनार के पत्तों को पानी में पीसकर सिर पर लेप करने से कुछ ही दिनों में गंजापन दूर हो जाता है।

नाखूनों का टूटना- अनार के पत्तों का रस नित्य नाखूनों पर रगड़ते रहने से नाखूनों का टूटना बंद हो जाता है। रस मलने के बाद तुरंत हाथों को नहीं धोना चाहिए।

दाग, धब्बे और झाइयां –पहले अनार के छिलकों को अच्छी तरह सुखा लें, फिर सिल पर पीसकर उनका बारीक पाउडर बनाएं। इस पाउडर को गुलाबजल के साथ मिलाकर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे और झाइयां दूर हो जाती हैं। 

हिस्टीरिया- बीस ग्राम अनार के हरे पत्ते और बीस ग्राम गुलाब के ताजे फूल-इन दोनों को आधा किलो पानी में उबालें। जब चौथाई पानी शेष रह जाए, तो उसे छानकर पचास ग्राम देशी घी और स्वादानुसार देशी खांड़ मिलाकर दस ग्राम नित्य पिएं। इससे हिस्टीरिया के दौरे में आराम हो जाता है। 

गर्भपात- योनि में अनार के वृक्ष की छाल की धूनी देने से गर्भपात हो जाता है। जिन स्त्रियों को दो-तीन दिन चढ़े हों, वे इसका प्रयोग करें।

नकसीर-अनार के फूल को थोड़े से दूध के साथ पीसकर देने से नासिका से गिरता हुआ रक्त तत्काल बंद हो जाता है। 

अतिसार-अनार की छाल, जावित्री, दालचीनी, धनिया तथा काली मिर्च का चूर्ण बनाकर सेवन कराने से बच्चों का पुराना अतिसार दूर हो जाता है। 

उदर कृमि- अनार का मूल और छाल-दोनों पांच तोले लेकर आधा किलो जल में पकाएं। जब आधा जल शेष रह जाए, तो पचास ग्राम की मात्रा में पिलाएं। इसे आधे-आधे घंटे के अंतर से देते रहें। इससे उदर के कृमि नष्ट हो जाते हैं।

मुंह के छालेअनार का छिलका, बबूल की छाल तथा सफेद कत्था–तीनों को अच्छी तरह पानी में औटाकर कुल्ले करें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। 

वमनअनार का रस तथा घी और उससे दुगुनी मात्रा में चीनी मिलाकर गाढ़ी चाशनी बनाएं। इसका सेवन करने से वमन में लाभ होता है।

कुष्ठ रोगअनार के पत्तों को पीसकर कोढ़ के घाव पर लगाने से लाभ होता है। 

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