Amir kaise bane hindi book-निर्णय लेने की क्षमता 

Amir kaise bane hindi book-

Amir kaise bane hindi book-निर्णय लेने की क्षमता 

“जीवन में आधी गलतियां तो केवल इसलिए होती हैं कि जहां हमें विचार से काम लेना चाहिए, वहां हम भावुक हो जाते हैं और जहां भावुकता की आवश्यकता है, वहां विचारों को अपनाते हैं।” -कार्लिस

निर्णय लेने की क्षमता का अभाव अनेक लोगों में देखा जाता है। आमतौर पर वे निर्णय लेने में काफी कन्फ्यू ज होते हैं। वे यह समझ नहीं पाते हैं कि आखिर क्या करें और क्या न करें। वे काफी परेशान रहते हैं। जब तक कुछ निर्णय लेते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। निर्णय लेने की क्षमता का न होना अमीर बनने में रुकावट डालता है। कई लोगों में देखा गया है वे कई काम दूसरे दिन के लिए इसलिए टाल देते हैं, क्योंकि वे सही निर्णय नहीं ले पाते।

अमीर बनने के लिए दुविधा वाली स्थिति ‘करूं या न करूं, ‘जाऊं या न जाऊं’ की स्थिति आगे बढ़ने से रोकती है। निर्णय लेने की क्षमता के 

अभाव में तेजी से आगे बढ़ना मुश्किल होता है। जिसकी वजह से आपका समय बर्बाद होता है। आज जमाना गतिशील है, जीवन का हर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। समय की गति के साथ चलने के लिए हमें तेज और तेज चलने की आवश्यकता है।

तेजी से बढ़ते जमाने के साथ यदि आप नहीं चल पाते हैं, एक पल के लिए स्थिर हो जाते हैं, ऐसे में आपके पीछे से आने वाले आपको धकेल कर गिरा देंगे और अपने पैरों तले आपको रौंदते हुए आगे बढ़ जाएंगे। आप नीचे छटपटाते हुए रह जाएंगे। 

आगे बढ़ना चाहते हैं, सफलता पाना चाहते हैं, कुबेर का खजाना हासिल करना चाहते हैं तो सभी दुविधाओं से बाहर निकल कर तुरंत निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें। तुरंत निर्णय लेने की क्षमता न होने पर समय नष्ट हो जाता है। जब तक आप अंतिम समय पर निर्णय लेते हैं तब तक तो सब कुछ समाप्त हो चुका होता है।

‘एलेवन्थ ऑवर’ में निर्णय लेने पर कई बार निर्णय गलत हो जाता है। निर्णय बदलने का मौका नहीं मिल पाता है। आकाश को दो बड़े प्रोजेक्ट मिले। वह निर्णय नहीं ले पा रहा था कि किस प्रोजेक्ट को फाइनल करे। दोनों ही प्रोजेक्ट में बराबर फायदा होने वाला था। वह सोचता रहा। इसी चक्कर में कई दिन निकल गए। आखिर में उसने पहली वाली कंपनी का प्रोजेक्ट फाइनल कर दिया। इस बीच उस कंपनी ने उसके सामने कुछ शर्ते रखीं। वे शर्तं पूरा करना आकाश के लिए मुश्किल था। उसने प्रोजेक्ट कैंसिल कर दूसरी कंपनी का प्रोजेक्ट फाइनल कर ऑफर भेजा। तब तक देर हो चुकी थी। उस कंपनी ने अपना प्रोजेक्ट किसी दूसरी कंपनी को दे दिया था। देर से निर्णय लेने की वजह से आकाश को दोनों अच्छे प्रोजेक्ट गंवाने पड़े।

जॉर्ज बर्नार्ड शा कहते हैं, “जो लोग इस दुनिया में आगे निकलते हैं, उन लोगों में सही निर्णय लेने की क्षमता होती है। किसी भी परिस्थिति में वे निर्णय ले सकते हैं। सही निर्णय लेने की क्षमता आगे बढ़ने में मददगार होती है। वहीं दुविधा वाली स्थिति होने पर खामियाजा भुगतना पड़ता है। समय पर सही निर्णय लेने वाला ही बुलंदियों तक पहुंचता है। समय पर सही निर्णय नहीं लेने वाला पिछड़ जाता है।” 

निर्णय लेते वक्त घबराएं नहीं, उस मुद्दे पर गहराई से सोचें। जब दिक्कत महसूस हो उस वक्त अपनी आंखों को बंद कर उसके बारे में दिल से सोचें। आपको हल मिल जाएगा। किसी निर्णय को लेते वक्त दूसरे के द्वारा दी गई सलाह को न मानें जो आपका दिल कहे उसे ही सही निर्णय मान कर चलें। किसी मुद्दे पर दूसरों से विचार-विमर्श करना बुरा नहीं है लेकिन दूसरे की सलाह पर चलना भी अच्छा नहीं है।

 ‘लोग क्या कहेंगे’ एक बहुत बड़ी समस्या है। इसकी वजह से अनेक लोग सही निर्णय नहीं कर पाते। किसी भी निर्णय को लेते वक्त इस बात को मन से निकाल कर निर्णय लें। जिस काम में आपको लाभ हो रहा हो उस निर्णय को चुनने में देर न करें। यदि किसी महत्त्वपूर्ण निर्णय में लाभ हो रहा है। उसमें खर्च करने की आवश्यकता है तो इसके लिए पीछे न हटें। निर्णय लेने में समय का भी ध्यान रखें। देर से निर्णय लेने में कई बार अनेक नुकसान भी हो सकते हैं। 

अमीर बनने के लिए क्या करना होगा- समय के साथ चलें

“समय पर ठीक तौर से काम न करने की आदत का ख्याल रखो। जो कुछ करना हो शीघ्र कर डालो, और काम कर लेने के बाद आराम करो, पहले आराम करने की चेष्टा मत करो।” 

-स्वेट मार्डेन

समय के साथ चलना समझदारी है। यदि आप समय के साथ नहीं चलते हैं तो समय आपको बाहर कर देगा। आप अमीर बनना चाहते हैं। अमीर बनने का सपना पूरा करना चाहते हैं। अमीर बनने का लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं, तो पुरानी तकनीक को भूल कर नई तकनीक पर निर्भर होना होगा। पुरानी तकनीक जंग लगे उन अस्त्र की तरह है जिनसे नए जमाने की जंग नहीं जीत सकते। 

बचपन में कछुए और खरगोश की कहानी आपने भी सुनी होगी। उसमें कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ खरगोश को हरा देता है, लेकिन अब वह जमाना बीत गया है। इसे सेटेलाइट युग कहा जाता है। इस जमाने में कछुए की चाल चलते रहे तो भीड़ में भी सबसे पीछे रह जाएंगे। कंप्यूटर, साइबर और जेट के जमाने में कछुए की चाल आपको मुकाम तक नहीं पहुंचा सकती। अमीर बनना है तो समय के साथ कदम से कदम मिलाना होगा। समय के साथ दौड़ना होगा। ऐसा काम शुरू करना होगा जो आज के जमाने का हो। कोल्हू के बैल या कुएं के मेढक बने रहने से काम नहीं चलेगा। 

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी तकनीक से आज की बाजारी जंग को जीत नहीं सकते। आज यदि आप बाजार में अपना रंग जमाना चाहते हैं तो नई तकनीक ही आपके लिए उपयोगी होगी। इसे समझने के लिए छोटी-सी बात जान लें। कलर के जमाने में आज कोई ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखना पसंद करेगा। नहीं, बस आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि समय के साथ चलना जरूरी है। तब जाकर लाभ मिल सकता है। 

समय के साथ जिन तकनीकों का आविष्कार हुआ है। वह जरूरत के मुताबिक ही हुआ है। उनकी अवहेलना नहीं की जा सकती। कभी ब्लैक एंड व्हाइट टीवी लोग बड़े शौक से देखते थे। जिसमें एक ही चैनल होता था। आज सैकड़ों चैनल वाला कलर टीवी देख रहे हैं। आज के जमाने में कोई सिंगल चैनल वाला ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखना पसंद नहीं करेगा। यह है नई और पुरानी तकनीक की बात। 

रत्नेश जी काफी समय से एक अखबार निकाल रहे थे। वर्षों पुराने इस अखबार की न्यूज काफी अच्छी होने के बावजूद लोगों को वह पसंद नहीं आती थी। लोग इसे खरीद कर पढ़ना पसंद नहीं करते थे। काफी लोगों ने रत्नेश जी से कहा कि वह अपने अखबार को ऑफसेट प्रेस पर अच्छे गेटअप के साथ निकालें। लोग अधिक पसंद करेंगे। रत्नेश जी को आज के जमाने का कंप्यूटर, ऑफसेट प्रेस, ग्राफिक डिजाइनिंग बिलकुल भी पसंद नहीं था। पुराने जमाने की ट्रेडल प्रेस जिंदाबाद। 

रत्नेश जी जब बूढ़े हो गए तो अखबार का काम उनके लड़के जतिन ने संभाला। पुरानी तकनीक की बजाय जतिन ने ऑफसेट पर नए गेटअप के साथ अखबार निकाला। लोगों ने इसे काफी पसंद किया। देखते ही देखते यह पूरे शहर में छा गया। रत्नेश जी जो काम वर्षों में नहीं कर पाए थे, वह काम उनके लड़के ने कुछ ही माह में कर दिखाया।

नई और पुरानी तकनीक में तुलना की जाए तो नई तकनीक सस्ती, सरल और स्पष्ट होती है। पुरानी तकनीक महंगी, समय को नष्ट करने वाली, कर्मचारियों को थकाने वाली, बार-बार बिगड़ कर परेशान करने वाली हो सकती है। अब आप खुद निर्णय लें कि आपको नई तकनीक पसंद है या पुरानी तकनीक। 

सर इमान मडोक का कहना है कि पुरानी परंपराओं, पुराने भवनों, प्राचीन संस्कृति और जीवन शैलियों की कद्र करना या उन्हें दिल में संजोए रखना अच्छी बात है, पर अमीर बनने के लिए टेक्नोलॉजी और प्रबंधन के मामले में पुरानी विधियों, पुरानी उत्पादन-लाइनों, पुराने बाजारों या पुरानी मानसिकताओं से चिपके रहना आत्महत्या के बराबर है। 

आइडिया सबसे महत्त्वपूर्ण

“कोई भी अवसर छोटा या बड़ा नहीं है। छोटे से छोटे अवसर का उपयोग करने से, अपनी बुद्धि को उसमें भिड़ा देने से वही छोटा अवसर बड़ा हो जाता है।” -स्वेट मार्डेन

अमीर बनने के लिए आइडिया सबसे महत्त्वपूर्ण है। यदि आपके पास एक अच्छा आइडिया है तो आप अमीरी के शिखर पर पहुंच सकते हैं। नेपोलियन हिल्स अपनी पुस्तक ‘थिंक ग्रो रिच’ में लिखते हैं कि जीवन में कुछ ठोस सोचो। अच्छा आइडिया सोचो और अमीर बन जाओ।

चीक शैंपू के निर्माता के दिमाग में शैंपू बेचने के लिए एक आइडिया आया। उन्होंने शैंपू के 50 पैसे के सेसे निकाल कर मार्केट में बेचने का निर्णय लिया। उनके आइडिया ने उपभोक्ता की दुनिया में तहलका मचा दिया। कंपनी ने अपने इस छोटे से आइडिया से करोड़ों रुपये का बिजनेस किया। देखा जाए तो 50 पैसे के सेसे निकालना एक छोटा-सा आइडिया था, जो और किसी कंपनी के दिमाग में नहीं आया। भारतीय बाजार में सबसे छोटे कीमत का शैंपू पैक लाने वाली यह कंपनी देखते ही देखते नंबर वन की श्रेणी में खड़ी हो गई।

करसन भाई का डिटर्जेंट पाउडर का आइडिया भी लोगों ने बहुत पसंद किया। “निरमा वाशिंग पाउडर, निरमा, निरमा…” लोगों की जुबान पर रट गया। आज स्थिति यह है कि बाजार में लोग वाशिंग पाउडर को निरमा पाउडर के रूप में जानते हैं। दस में से आठ ग्राहक कोई भी वाशिंग पाउडर मांगने की बजाय निरमा वाशिंग पाउडर ही मांगते हैं।

ऑटोमोबाइल उद्यमी हेनरी फोर्ट के दिमाग में आठ सिलेंडर वाला एक ऐसा इंजन बनाने का आइडिया आया, जिसके आठों सिलेंडर एक ही ब्लॉक में हों। यह मॉडल जब बना तो सिर्फ अमेरिका ही नहीं सारी दुनिया में स्थापित हो गया। आज फोर्ट गाड़ियों की एक अलग पहचान है। जिसका श्रेय जाता है हेनरी फोर्ट के आइडिया को। 

याहू के मालिक समीर भाटिया का फ्री ई-मेल भेजने का आइडिया दुनिया के लोगों को भा गया। भाटिया ने याहू द्वारा फ्री ई-मेल भेजने की शुरुआत की। इसके बावजूद कंपनी को करोड़ों डॉलर का फायदा हुआ। यह भाटिया के आइडिया का ही कमाल था। 

शाहनाज हुसैन ने ब्यूटी के क्षेत्र में उस वक्त कदम रखा, जब लोग ब्यूटी के प्रति उतना जागरूक नहीं थे। शाहनाज हुसैन का यह आइडिया फायदेमंद साबित हुआ। आज भारत के लगभग हर बड़े शहर में उनके ब्यूटी पार्लर हैं। शाहनाज हुसैन ने बताया कि जब वह लंदन में पढ़ रही थीं। उस वक्त उनकी एक मित्र जो सफल मॉडल थी, रसायन पर आधारित एक सन टैन लोशन का इस्तेमाल करने पर बुरी तरह जल गई। उस सहेली को इतना धक्का लगा कि उसने आत्महत्या कर ली। 

सहेली की आत्महत्या ने शाहनाज को दुखी किया और उन्होंने तभी सोच लिया कि मैं आयुर्वेद, पौधों और जड़ी-बूटियों से सौंदर्य प्रसाधन तैयार करूंगी। आज उन्होंने सौंदर्य प्रसाधन का एक साम्राज्य खड़ा कर दिया। फिटनेस के प्रति लोग जिस तरह से सचेत हो रहे हैं, उसे देखकर विष्णु तलवलकर ने कसरत के अपने शौक को कारोबार में बदल कर पूरे भारत में तालवलकर्स जिम का सबसे बड़ा चेन फैला दिया।

कहने का मतलब यह है कि कोई भी आइडिया आपको आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। आइडिया तैयार कर सकते हैं तो आप आगे बढ़ सकते हैं। आइडिया बना सकते हैं, तो आप जीत सकते हैं। आइडिया पारस पत्थर के समान है जो आपकी लाइफ को गोल्ड में बदल सकता है। आपको अमीर बना सकता है। फिर देर किस बात की, आप भी कोई अच्छा सा आइडिया ढंढें। एक अच्छा-सा आइडिया ढंढ़ लेते हैं तो आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

eight − two =