Amir kaise bane chanakya niti-टालमटोल न करें 

Amir kaise bane chanakya niti

Amir kaise bane chanakya niti-टालमटोल न करें 

“कोई व्यक्ति जब तक अपने काम में अपने आपको झोंक नहीं देता तब तक वह महान काम नहीं कर पाता।” -जॉन वानामेकर

अमीर बनने के लिए आपको टालमटोल से बचना होगा। जब आप अपना कोई एक काम पूरा करते हैं तो इससे दूसरे काम की सीढ़ी अपने आप बन जाती है। यह सिलसिला तब तक जारी रहता है, जब तक आपके पास काम की कोई कमी नहीं होगी। आप हर रोज सीढ़ी चढ़ते हुए ऊपर की ओर बढ़ते चले जाते हैं। 

किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल करना चाहते हैं तो अपने काम को सही वक्त पर करना सीखें। नेपोलियन हिल्स कहते हैं कि सही वक्त पर काम न करने वाले गरीबी की खोह से निकल सकते हैं। काम को टालने की आदत उन्हें गरीबी से मुक्त नहीं होने देती। दुनिया में आज तक जितने भी लोग अमीर बने हैं। उन सभी में एक खास बात देखी गई है। उन्होंने अपना काम कभी नहीं टाला। समय से अपना काम करने की बदौलत ही वे अमीर बन पाए। 

जब आप काम को पूरा करने की बजाय टालने लगते हैं। तब आप सफलता की ऊंचाई पर जाने की बजाय नीचे की ओर आने लगते हैं। रोहित ने अपना प्रिंटिंग प्रेस खोला। उसके पास प्रिंट करवाने के लिए लोगों की लाइन लगने लगी। रोहित उनसे एडवांस रुपये तो ले लेता था, लेकिन समय से उन्हें काम पूरा करके नहीं देता था, क्योंकि उसे काम को टालने की बुरी आदत थी। जिसकी वजह से काम करवाने वालों की संख्या घटने लगी।

टालमटोल एक बुरी आदत है। टालमटोल की आदत सफलता की ऊंचाइयों पर ले जाने की बजाय नीचे की ओर ले जाती है। टालमटोल की आदत जिंदगी के हर लम्हों को प्रभावित करती है। टालमटोल की आदत पिछड़ेपन की निशानी है। टालमटोल करने वालों को आलसी, कामचोर और नाकामयाब समझा जाता है। यह आदत आपके कीमती समय की भी दुश्मन है, जो आपसे सफलता को छीन कर आपके हाथ में असफलता का कटोरा थमा देती है। 

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. बेलमन सोक का कहना है कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं-एक काम करने वाले तथा दूसरे काम को टालने वाले। काम को समय से करने वाले एक न एक दिन जरूर सफल होते हैं। काम को टालने वाले जीवन में कभी भी सफल नहीं होते। काम टालने की अपनी आदत की वजह से वे हमेशा पिछड़े व गरीब रहते हैं। 

टालमटोल की आदत क्यों पनपती है। इस बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि आलस्य, इच्छाशक्ति की कमी, काम में रुचि न होना, एकाग्रता का अभाव, खुद को अक्षम मानना, नकारात्मक सोच, परिणाम के प्रति अनिश्चिता या परफेक्शननिस्ट न होने से टालमटोल की आदत पड़ जाती है। 

क्या टालमटोल की बुरी आदत से बचा जा सकता है। इस बारे में मनोचिकित्सक डॉ. बेरिन बुली का कहना है कि टालमटोल की बुरी आदत से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे छुटकारा पाना थोड़ा कठिन जरूर है पर असंभव नहीं। सबसे पहले अपने मन में इस बात को बार-बार दोहराएं कि आप काम को कभी नहीं टालेंगे। किसी भी काम को समय से पूरा करेंगे। इसके अलावा टालमटोल की आदत से बचने का सबसे अच्छा उपाय है आलस्य दूर करें, अपने अंदर इच्छा शक्ति उत्पन्न करें, काम के प्रति रुचि पैदा करें, स्वयं को अक्षम न समझें, मन से भय को निकाल दें, अपने अंदर सकारात्मक सोच को उत्पन्न करें और पूरे आत्मविश्वास के साथ काम करें। 

अमीर बनने के लिए टालमटोल की आदत को अपनी जिंदगी से निकाल दें। आप जितनी जल्दी टालमटोल की आदत को अपनी जिंदगी से निकाल देंगे, उतनी ही जल्दी आप अमीर बनने में कामयाबी हासिल करेंगे। समय पर काम पूरा होने पर खुशी मिलेगी, संतोष मिलेगा, उत्साह मिलेगा, तनाव दूर होगा और सफलता मिलेगी।

अमीर बनना चाहते हैं तो किसी भी काम को टालने से बचें। काम को समय से पूरा करें। हो सके तो समय से पहले पूरा कर लें। काम को सही वक्त पर करके आप सफलता की ऊंचाइयों को छू सकते हैं। 

Amir kaise bane- चाइनीज प्रॉडक्ट न बनें 

“अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न हो पाने का कारण यह है कि हम छोटी चीजों को पहले करने में अपना समय बिता देते हैं। इससे समय और ऊर्जा दोनों का दुरुपयोग होता है।” -रॉबर्ट जे. मैकैन

समीर ने एमबीए का कोर्स किया था। वह जल्द से जल्द रुपये कमा कर अमीर बनना चाहता था। उसने अपना काम शुरू करने के लिए बैंक से लोन ले लिया। लोगों पर अच्छा प्रभाव जमाने के चक्कर में उसने एक अच्छा-सा ऑफिस और आने-जाने के लिए एक महंगी कार भी ले ली। इतना सब कुछ होने के बाद भी वह अपना बिजनेस नहीं चला सका और एक साल के अंदर उसे अपना बिजनेस बंद करना पड़ा।

वहीं दूसरी ओर राहुल ने ग्रेजुएशन किया था। वह भी अमीर बनना चाहता था। उसने कई सालों तक अच्छी नौकरी की तलाश की, लेकिन उसे कहीं अच्छा काम नहीं मिलता तो कहीं मन मुताबिक पैसा नहीं मिल रहा था। हार कर उसने नौकरी की तलाश छोड़ दी और स्वयं का बिजनेस शुरू करने का निश्चय किया। 

राहुल ने इधर-उधर से कुछ रुपये लेकर एक छोटा-सा काम शुरू कर दिया। अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए उसने भागदौड़ शुरू कर दी। पैसों की कमी थी। बहुत सारे काम उसे स्वयं ही करने पड़ते थे। कई बार इतनी आर्थिक समस्या आ जाती कि उसे लगता अब काम बंद कर देना पड़ेगा। पर राहुल अपनी जिद पर अड़ा रहा। उसने मन में ठान लिया था कि उसे किसी भी हाल में अमीर बनना है। वह पीछे नहीं हटा, अपना संघर्ष जारी रखा। आखिर में उसने अपना काम अच्छे ढंग से जमा लेने में सफलता हासिल कर ली। 

समीर और राहुल दोनों ही अमीर बनना चाहते थे। इसके लिए दोनों ने अपना-अपना काम भी शुरू किया। समीर के पास सारी सुविधाएं थीं। फिर भी वह अमीर बनने में कामयाब नहीं हो सका, क्योंकि उसमें अमीर बनने की जिद नहीं थी। जबकि राहुल के पास सुविधाएं न होने के बावजूद उसमें अमीर बनने की जिद थी। इसीलिए अमीर बनने में उसे सफलता मिली। 

दुनिया में समीर के जैसे अनेक लोग हैं। जिनके पास एमबीए जैसी डिग्री तो है पर उनके अंदर किसी चीज को हासिल करने की जिद नहीं है। इन्हें हम चाइनीज प्रॉडक्ट कह सकते हैं। सिर्फ पढ़ाई करने या डिग्री लेने से अमीर नहीं बन सकते। अमीर बनने के लिए मन में जिद का होना भी जरूरी है। जब आप किसी चीज को पाने की जिद कर लेते हैं तब जाकर सफलता मिलती है। 

आप अमीर बनना चाहते हैं तो अपने अंदर जिद पैदा करें कि मैं अमीर बन कर दिखाऊंगा। जब आप अपने मन में यह निश्चिय कर लेते हैं कि अमीर बनकर ही रहूंगा ‘मैं’। तब जाकर आप अपने उद्देश्य में कामयाब होते हैं। क्योंकि जब आप किसी बात को पाने की जिद कर लेते हैं, तो उसे पाने के लिए जी-जान से जुट जाते हैं और किसी तरह उसे पाने की कोशिश में लग जाते हैं तथा उसे हासिल करके रहते हैं।

सुधाचंद्रा को बचपन से ही क्लासिकल डांस का बहुत शौक था। वह क्लासिकल डांसर बनना चाहती थी, लेकिन दुर्भाग्य से एक कार एक्सीडेंट में सुधा को अपना पांव गंवाना पड़ा। बिना पैरों के सुधाचंद्रा अब नाच नहीं सकती थी। सभी ने इसे भाग्य का लिखा कह कर छोड़ दिया, लेकिन सुधाचंद्रा यह बात मानने के लिए तैयार नहीं थी। वह अपना सपना पूरा करना चाहती थी। 

एक दिन सुधाचंद्रा कृत्रिम पैर लगाकर अपने गुरु के पास डांस सीखने पहुंची। उसकी जिद और दृढ़ निश्चय को देखकर गुरु उसे डांस सिखाने के लिए तैयार हो गए। शुरू-शुरू में कई बार उसे खड़े होने में परेशानी होती थी। नाचते-नाचते उसके पैरों से खून बहने लगता था, लेकिन उसने अपनी मंजिल पाने के लिए मन में जिद पकड़ ली थी कि कुछ भी हो जाए वह एक दिन अच्छी डांसर बनकर रहेगी। जिद की वजह से वह अपने लक्ष्य को पाने में सफल हुई। जब सुधाचंद्रा को लोगों ने नकली पैर से पहली बार स्टेज पर क्लासिकल नृत्य करते हुए देखा तो आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि जो असंभव था उसे सुधाचंद्रा ने संभव करके दिखाया था। 

कुछ लोग अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं। वे अपना सामान ठीक से नहीं बेच पाते हैं। लोगों को अपने सामान की तरफ आकर्षित करने में असफल होते हैं। उन्हें लाभ की जगह हानि उठानी पड़ती है। असफलता के कारण वे निराशा व हताशा में डूब जाते हैं। वे समस्या से निपटने की कोशिश करने की बजाय अपने कदम पीछे की ओर ले लेते हैं और चीनी प्रॉडक्ट की तरह बन जाते हैं। 

अमीर बनना चाहते हैं तो चीनी प्रॉडक्ट न बनें। इसके लिए अपने मन में जिद करें और सफल हो जाने वाला नजरिया उत्पन्न करें। आपका यह नजरिया अमीर बनने में मदद करेगा। 

1 Comment

  1. टालमटोल की आदत ,
    एक सार गर्भित लेख के लिए बधाई .. आपने जितने बेहतरीन शब्दों का प्रयोग किया है एवं जितने अच्छे उपायों से इस पोस्ट को लिखा है , वह वाकई तारीफ़ के एवं प्रत्येक आयुवर्ग के व्यक्ति को आसानी से समझ में आने योग्य है .. आगे भी इसी तरह के व्यक्तित्व विकास से सम्बंधित पोस्ट लिखते रहें एवं अपने पाठकों को प्रोत्साहित करते रहें ..
    यही शुभकामना है…

    धन्यवाद

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