Amir banne ke liye kya kare-भूलने की बुरी आदत

Amir banne ke liye kya kare

Amir banne ke liye kya kare-भूलने की बुरी आदत

“अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न कर पाने का कारण यह है कि लोगों को क्या करना है यह खुद ही भूल जाते हैं।” -रॉबर्ट जे.

फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय जो नेपोलियन महान के भतीजे थे। उनकी याददाश्त के बारे में कहा जाता है कि वे अपने राज्य के हर पुरुष और स्त्री को नाम से पहचानते थे। जिसकी वजह से वे राज्य में लोकप्रिय थे। जब हम यह भूल जाएंगे कि हमें क्या हासिल करना है। तब हम उसे कैसे हासिल कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि भूलना एक कमजोरी है, एक बुरी आदत है, एक बीमारी है। यदि आपको भूलने की आदत है और आप अमीर बनना चाहते हैं तो भूलने की आदत को छोड़ना होगा।

जीवन में आगे बढ़ना है तो भूलने की आदत से बचना होगा। लोगों का नाम भूल जाना, काम भूल जाना, सामान लाना भूल जाना, सामान ले जाना भूल जाना, किससे क्या कहना है भूल जाना, आज का प्रोग्राम क्या है भूल जाना, किसके साथ मीटिंग है भूल जाना, शाम का डिनर कहां लेना है, भूल जाना, किसको माल भेजना है भूल जाना, किसी को फोन करना है भूल जाना जैसी अनेक छोटी-बड़ी बातें हैं, जिन्हें लोग अक्सर भूल जाते हैं। भूलने वाले लोग कभी भी अमीर नहीं हो सकते। रिचर्ड सॉन्डर्स कहते हैं कि जिसे भूलने की आदत होती है वह अन्य किसी काम में निपुण नहीं होता। 

जीवन में अमीर बनना चाहते हैं तो इससे बचना जरूरी है। राजेश ने अमीर बनने के लिए अपना कारोबार शुरू किया। उसे अच्छा ऑर्डर मिलने लगा। लेकिन राजेश को भूलने की बुरी आदत थी। जिसकी वजह से वह अपना काम अच्छे ढंग से जमा नहीं पाया। जब कोई ऑर्डर मिलता, राजेश उसे समय से पहुंचाना भूल जाता, टेलीफोन पर जो ऑर्डर नोट करता, उस ऑर्डर को भेजना भूल जाता। यहां तक कि उसे कितना माल तैयार करना है, कारीगर को यह बताना भूल जाता था। किससे मिलना है यह तक भूल जाता। 

किसी पार्टी के साथ डिनर लेना है और ऑर्डर के बारे में डिस्कस करना है वह भूल जाता। किसी के साथ कोई खास मीटिंग है, वह वहां जाना भूल जाता था। व्यापार ही नहीं राजेश घर के काम करना भी भूल जाता था। उसके भूलने की वजह से उसकी पत्नी परेशान रहती। उसकी पत्नी ने राजेश की आदत को सुधारने की काफी कोशिश की लेकिन राजेश अपनी आदतों से बाज नहीं आया। उसकी आदतों के कारण पति-पत्नी में अक्सर झगड़ा होता रहता था। 

अपनी भूलने की आदत की वजह से राजेश को अपने कारोबार में काफी घाटा उठाना पड़ा। आखिर में उसे अपना कारोबार बंद करना पड़ा। यही नहीं उसकी पत्नी भी उसे छोड़ कर मायके चली गई। वहां से उसने तलाक के लिए नोटिस भिजवा दिया। अब आप समझ सकते हैं कि भूलने की आदत कितनी परेशानदायक होती है। राजेश की तरह ऐसे अनेक लोग हैं, जिन्हें भूलने की आदत है। वे अपनी असफलता का दोष अपनी आदत को न देकर अपने भाग्य को देते हैं। 

भूलना हार की निशानी है। जीत उन्हीं की होती जिनकी याददाश्त अच्छी होती है। शतरंज की बाजी जीतनी है तो याददाश्त अच्छी होना जरूरी है। भूलने वाला व्यक्ति कभी भी परीक्षा में पास नहीं हो सकता है। भूलने वाला व्यक्ति बिना पते वाले लिफाफे के समान होता है। वह बिना पते के जहां-तहां भटकता रहता है। अमीर बनने के लिए यह महत्व नहीं रखता है कि आप कितना काम करते हैं, बल्कि यह महत्व रखता है कि आपकी याददाश्त कितनी अच्छी है। यदि आपको भूलने की आदत है तो अपनी आदत को तुरंत बदल डालें। अपनी आदतों को बदल कर ही आप भविष्य में अमीर बनने के लक्ष्य को पा सकते हैं। 

Amir kaise bane hindi- सहयोग में शर्म कैसी 

“प्रत्येक दस व्यक्तियों में से नौ इस प्रकार के होते हैं, जो बहुत-सी योजनाएं बनाते हैं। विशाल पैमाने पर सोचते हैं, पर करते कुछ नहीं। ऐसी बात नहीं कि उनमें कार्यक्षमता न हो या वह इस योग्य न हों। बस, एक सबसे बड़ी दुर्बलता उनकी होती है कि वे संकल्प को कार्य रूप में नहीं ढालते, यही कारण है कि असफल लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।” -डॉक्टर विलियम मैथ्यूज

यदि आप घमंड और गरूर में रहते हैं, तो आप भविष्य में कभी अमीर नहीं बन सकते। अमीर बनने के लिए आपको दूसरे की मदद की आवश्यकता होती है। साथ ही साथ उन्हें सहयोग देने की भी आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में यदि आप अपने कर्मचारियों की मदद नहीं करेंगे तो वे भी आपको अमीर बनने में मदद नहीं करेंगे। अमीर बनने के लिए आपको उनकी मदद करने में शर्म नहीं करनी चाहिए। 

जो लोग अपने कर्मचारियों की बातों को अहमियत नहीं देते हैं। कर्मचारियों को नीचे दर्जे का समझते हैं। उनकी समस्या को सुनने या सुलझाने के लिए समय नहीं देते हैं। उनके किसी गंभीर समस्या में फंस जाने पर साथ नहीं देते हैं। जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को सहयोग नहीं देते हैं। तो जान लें, वे जीवन में कभी अमीर नहीं बन सकते।

सफलता और असफलता इस बात पर निर्भर है कि आप स्वयं को किस तरह से प्रस्तुत करते हैं। किसी काम को पूरा करने में आप सहयोग देते हैं। अपने काम से प्यार करते हैं। अपने सहयोगी व कर्मचारी को कंधा लगाने में शर्म महसूस नहीं करते हैं। यदि इनका जवाब ‘हां’ में है तो आप किसी भी कार्य में अवश्य सफलता हासिल कर सकते हैं। 

एक बार राजा देवचंद अपने राज्य का दौरा कर रहे थे। उनके साथ सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी थी। कुछ सैनिक आगे और कुछ सैनिक राजा के पीछे-पीछे चल रहे थे। चलते-चलते राजा देवचंद ने एक स्थान पर एक बूढ़े किसान को देखा, जिसकी बैलगाड़ी कीचड़ में फंस गई थी। बूढ़ा किसान बैलगाड़ी को कीचड़ से निकालने की जी तोड़ कोशिश कर रहा था, लेकिन वह निकल नहीं रही थी। 

राजा के सैनिकों ने भी उस किसान को देखा और अनदेखा करते हुए आगे बढ़ गए। राजा देवचंद का रथ जब वहां पहुंचा तो उन्होंने सारथी को रथ रोकने का आदेश दिया। 

रथ से उतर कर राजा ने बूढ़े किसान की बैलगाड़ी को कीचड़ से निकालने में मदद की। राजा देवचंद की मदद से बैलगाड़ी कीचड़ से बाहर निकल गई। राजा को कीचड़ से सना देखकर सैनिक आश्चर्यचकित रह गए। राजा देवचंद ने सैनिकों से कहा कि किसी की मुसीबत के समय उसे सहयोग देने में अर्थात उसके साथ हाथ से हाथ मिलाकर काम करने में शर्म नहीं करनी चाहिए। 

इसी तरह की एक घटना मुझे याद आ रही है। एक स्थान पर कुछ सैनिक एक बड़े से पत्थर को हटाने की कोशिश कर रहे थे। पास में खड़ा सार्जेंट उन पर हुक्म चला रहा था। इतने में एक घुड़सवार वहां आया। उसने देखा सैनिक जिस पत्थर को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि उन्हें एक व्यक्ति की और मदद मिल जाए तो वह पत्थर वहां से आसानी से हट सकता है। घुड़सवार ने सैनिक के साथ पत्थर को हटाने में हाथ लगा दिया। 

पत्थर वहां से हट गया। पत्थर हटाने के बाद घुड़सवार ने सार्जेंट से कहा, “तुम यहां खड़े-खड़े यह सब देख रहे थे। इनकी मदद तो कर सकते थे।” 

सार्जेट बोला, “मैं इनका सार्जेंट हूं। मेरा काम है इन्हें ऑर्डर देने का, काम करने का नहीं।” 

घुड़सवार ने सैनिकों से कहा, “साथियो, मन लगा कर काम करो। कभी ऐसी जरूरत हो तो जनरल को याद कर लेना।” इतना कहकर जनरल वहां से चला गया। मजदूरों की मदद करके जनरल ने कोई बुरा काम नहीं किया था। इससे जनरल की इज्जत घट गई हो ऐसा नहीं है। बल्कि वह दूसरों की नजरों में और अधिक महत्वपूर्ण बन गया। इसी तरह जब कभी अपने कर्मचारियों के लिए कहीं भी, किसी तरह की मदद की आवश्यकता हो तो निसंकोच उनकी मदद करें। सहयोग करना एक अच्छी आदत है। इसे अपने जीवन में शुमार करना चाहिए। यह अमीर बनने के लक्ष्य में आपकी मदद करता है। 

आप मालिक हैं। आपको चाहिए कि अपने कर्मचारियों को आदेश देकर काम करवाएं और जरूरत हो तो उनके साथ काम करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। कई बार मिल कर काम शुरू करना पड़ सकता है। कभी बीच में सहयोग देना पड़ सकता है। कभी बार-बार अपने कर्मचारियों की मदद करनी पड़ सकती है। जो अपने कर्मचारियों की मदद करने में हिचकते नहीं हैं, वे अमीर बनने में सफलता हासिल करते हैं। 

बैलगाड़ी कहीं फंस गई है। फंसा हुआ बैल कभी भी यह नहीं कहता है कि मुझे बाहर निकालने में मदद कर दो। ठीक उसी तरह काम करने वाला मजदूर आप से यह नहीं कहेगा कि परेशानी के समय में आप उसकी मदद कर दें। यह तो आपको खुद समझना होगा कि कब, कहां, किस समय अपने कर्मचारियों की मदद करनी है। जिससे रुका हुआ काम आसानी से हो जाए। 

Amir hone ka tarika-बिजनेस के अलावा

“अगर आप सफल होना चाहते हैं तो आपको सफलता के घिसे-पिटे रास्ते पर चलने की बजाय नए रास्ते बनाने 

चाहिए।” -जॉन डी. रॉकफेलर

अधिकतर लोग व्यापार को अमीर बनने का सबसे सीधा व सरल रास्ता समझते हैं, जबकि व्यापार के अलावा ऐसे अनेक रास्ते हैं, जो आपको और जल्दी अमीर बना सकते हैं। डेल कारनेगी लोक व्यवहार पर पुस्तक लिखने वाले लेखक थे। उनकी पुस्तक बेस्टसेलर बनी। हैरी पॉटर की श्रृंखला लिखने वाली जे. के. रोलिंग को अपनी इस श्रृंखला के लिए करोड़ों डॉलर की कमाई हुई। 

एफ.एम. हुसैन ने फिल्मों के पोस्टर बनाने से अपना काम शुरू किया था। आज दुनिया के सबसे अमीर चित्रकारों में उनकी गिनती होती है। उनके द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग करोड़ों डॉलर में बिकती है। क्रिकेट खेल कर सचिन तेंदुलकर ने अरबों की सम्पत्ति अर्जित की। अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय से केवल लोगों का दिल ही नहीं जीता, बल्कि अरबों रुपये भी कमाए हैं। 

जीटीवी के मालिक सुभाष चंद्रा ने भारत में प्राइवेट टीवी चैनल की शुरुआत की। उन्होंने चैनल के माध्यम से करोड़ों रुपये कमाए। याहू डॉट कॉम द्वारा फ्री ईमेल की सुविधा आरंभ कर समीर भाटिया ने काफी दौलत कमाई। भारत में मोबाइल कंपनी एयरटेल की शुरुआत कर सुनील भारती ने अच्छा बिजनेस किया। 

आज जमाना आइडिया का है। आज बिजनेस के अलावा भी ऐसे अनेक रास्ते हैं, जिनके द्वारा अपनी प्रतिभा को दिखा कर आप अमीर बन सकते हैं। खेल, अभिनय, लेखन, चित्रकारी, काउंसलिंग, पीआरओ, फैशन, ग्लैमर, इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक आदि बन कर भी आप अमीरी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको स्वयं के अंदर झांकना होगा। अपने अंदर की प्रतिभा को तलाशना होगा। जिसके द्वारा आप अमीरी हासिल कर सकते हैं। अपनी प्रतिभा को निखार कर आप अमीर बन सकते हैं। 

दीप के पास अच्छी शिक्षा थी। उसने अमीर बनने का सपना देखा। इसके लिए वह कोई व्यापार करना चाहता था। वह समझ नहीं पा रहा था कि कौन-सा व्यापार शुरू करे। इस बारे में उसने काफी लोगों से बात की लेकिन किसी ने उसे सही सलाह नहीं दी। उसकी एक खासियत थी कि वह अच्छा गाता था। 

एक दिन दिलेर मेहंदी के गाने सुनकर उसके मन में आया कि क्यों न वह भी अपनी आवाज में गाने रिकार्ड करवा कर एलबम बनाए। उसने ऐसा ही किया। अपनी आवाज में एलबम तैयार कर मार्केट में डाल दिया। गजब की आवाज, बढ़िया म्युजिक और बढ़िया गीत होने की वजह से एलबम जबरदस्त हिट हो गया। 

एक एलबम हिट होने पर दीप की किस्मत ही बदल गई। उसने एक के बाद एक कई हिट एलबम दिए। पंजाबी फिल्मों में भी उसे गाने का मौका मिला। साल में दो-तीन बार विदेश में प्रोग्राम देने के लिए जाता है। आज उसके कई शहरों में रिकॉर्डिंग स्टुडियो हैं। 

आप भी अमीर बनना चाहते हैं तो टाटा, बिड़ला या बजाज कंपनी की तरह अपनी कंपनी खड़ी करने की बजाय कोई अन्य बिजनेस जो आप आसानी से करके अमीर बन सकते हैं, कर सकते हैं। कहने का मतलब है कि बिजनेस ही नहीं अन्य तरीकों से भी पैसा कमा कर अमीर बना जा सकता है। 

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