Amir Banne Ka Mantra-नेतृत्व क्षमता जरूरी

Amir Banne Ka Mantra-

Amir Banne Ka Mantra-नेतृत्व क्षमता जरूरी

“बहुत कम लोगों में क्षमता का अभाव होता है, लेकिन वे असफल इसलिए होते हैं, क्योंकि वे अपनी क्षमता का उपयोग नहीं करते।” -कैल्विन

कूलिज जिनमें नेतृत्व की क्षमता नहीं होती, वे दूसरों की बातों पर उठते-बैठते हैं। यदि आप अमीर बनना चाहते हैं तो आप में नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए। क्योंकि अमीर बनने के लिए आपको स्वयं का बिजनेस करने की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में आप में नेतृत्व क्षमता यानी लीडरशीप का भाव होना चाहिए, तभी आप अपने बिजनेस को अच्छी तरह से चला सकते हैं। अमीर बन सकते हैं।

एक लीडर में दूरदर्शिता, व्यवहारकुशलता, लक्ष्य और परिणाम के बारे में जानकारी जैसे गुण होने चाहिए। उसमें कंपनी को आगे ले जाने का नजरिया होने के साथ कर्मचारियों को खुश रखने, उन्हें प्रोत्साहन, साहस और कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का जुनून होना चाहिए।

जिनमें नेतृत्व क्षमता होती है, उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उनका कहना दूसरे लोग भी मानते हैं। उनकी बातों को सुनते हैं। उनके साथ चलते हैं। यह बातें बौद्धिक स्तर और सैद्धांतिक स्तर पर सही हैं। कोई व्यक्ति आपकी बात से तभी प्रभावित होगा जब आप अपने विचारों से उसे प्रभावित करेंगे। जब आप उसके अंदर अपने प्रति भरोसा पैदा करेंगे। उसे समस्याओं से जूझने के लिए साहस और शक्ति देंगे, तभी वह आपके नेतृत्व में कार्य करेगा। 

नेपोलियन में नेतृत्व क्षमता थी। सिकंदर में भी नेतृत्व क्षमता थी। तभी वे विजेता बने। धीरूभाई अंबानी में नेतृत्व क्षमता थी। तभी उन्होंने लोगों को एकत्र करके विशाल कंपनी की नींव रखी। बिल गेट्स, लक्ष्मी मित्तल, 

अजीम प्रेमजी, करसन भाई, नारायण मूर्ति, घनश्यामदास बिड़ला जैसे नाम हैं जिनमें नेतृत्व क्षमता थी। तभी वे अपने बिजनेस को बड़ा बना सके। बिजनेस को ऊंचाई तक ले जाना है तो अपने अंदर नेतृत्व की क्षमता का विकास कीजिए। 

अमीर बनने के लिए व्यक्ति के अंदर नेतृत्व के गुण किस तरह से होने चाहिए, इस बारे में बिजनेस एडवाजर जोजफ कार्न का कहना है कि एक अच्छे नेतृत्व के गुण वाले व्यक्ति के अंदर कई गुण होते हैं। उसके अंदर देर रात तक काम करने की क्षमता होती है। वह औरों से अधिक कई गुणा काम करने की क्षमता रखता है। किसी काम के बारे में सही निर्देश देना जानता है। कब, कौन-सा कदम उठाना है वह अच्छी तरह समझता है। वह अपनी सोच को हमेशा बड़ा बनाए रखता है। 

कर्मचारियों व अधिकारियों को ऊंची सोच बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। कंपनी को सफलता की ऊंचाई तक ले जाने की तैयारी में हमेशा लगा रहता है। वह स्वयं अपने आप पर विश्वास करता है। वह दूसरों के अंदर भरोसा पैदा करने की क्षमता रखता है। 

एक पत्रिका के संपादक स्यांग चुंग का कहना है कि जिनमें नेतृत्व क्षमता होती है, वे अपने व्यक्तित्व से अपने कर्मचारियों को इतना प्रभावित करते हैं कि वह अपनी टीम के रोल मॉडल बन जाते हैं। टीम को अच्छे ढंग से समझते हैं। टीम को लेकर नया इतिहास रचने की कोशिश में लगे रहते हैं। जब आप अमीर बनने के लिए अपना काम शुरू करें, तब एक अच्छे लीडर की तरह काम करें। आप कितने भी बड़े क्यों न बन जाएं, जमीनी सचाई को न भूलें। मतलब अपने शुरुआती दिनों के बारे में न भूलें। आसमान की बुलंदी को छूने के बाद जो लोग जमीनी हकीकत को भूल जाते हैं, उन्हें नीचे आने में देर नहीं लगती। 

सब कुछ अच्छा-अच्छा ही मिल जाएगा, ऐसा नहीं है। कभी ऐसे लोग भी मिल जाते हैं, जो बात को समझते नहीं हैं। कभी-कभी ऐसे लोगों से वास्ता पड़ जाता है, जो समझने के बाद भी समझने की कोशिश नहीं करते। कुछ लोग अच्छा काम नहीं होने देना चाहते। कुछ तो काम को हमेशा बिगाड़ने में ही लगे रहते हैं। ऐसी स्थिति में आपको समझदारी से काम लेने की आवश्यकता होती है। यही आपकी नेतृत्व क्षमता का कमाल है कि आप इतनी परेशानी के बावजूद कितनी अच्छी तरह से उनसे अपना काम करवा लेते हैं। 

अच्छी नेतृत्व क्षमता के लिए गौर करें: 

किसी काम के बारे में निर्देश देना सीखें। 

जो भी काम सोचें, ऊंचा सोचें। 

खुद पर विश्वास करें।

दूसरों के भरोसे काम न करें। न

ई चुनौतियों के लिए तैयार रहें।

काम बिगड़ने पर दोष दूसरों को न दें।

अपनी टीम के लिए रोल मॉडल बनें।

कितने भी बड़े बन जाएं अपनी शुरुआत को न भूलें।

हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखें।

काम के प्रति विश्वास रखें।

जिम्मेदारी की भावना पैदा करें। 

टीम का सम्मान करें। 

कम्युनिकेशन गैप न होने द

amir banne ke liye kya karen-हमेशा जीत की सोचें 

“कोई व्यक्ति जब तक अपने काम में अपने आपको झोंक नहीं देता तब तक वह महान काम नहीं कर पाता।” -जॉन वानामेकर

अमीर बनना चाहते हैं तो हमेशा अपनी जीत की सोचें। दुनिया में वही सफल होते हैं, जो हमेशा जीत की सोचते हैं। विजेता नेपोलियन के शब्द-कोश में ‘हार’ शब्द नहीं था। वैसे ही अपने शब्दकोश से ‘हार’ शब्द को निकाल कर बाहर फेंक दें और मन में हमेशा जीतने की सोचें। 

अमीर व्यक्ति नहीं बन सकता या मैं जीत नहीं सकता या मैं जीत नहीं पाऊंगा, जैसे वाक्य आपके मन को हतोत्साहित करेंगे। इस तरह की सोच आपको कभी भी आगे नहीं बढ़ने देगी। अमीर नहीं बन सकता यानी अमीर बनने की कोशिश करने से पहले ही अपने को गरीब मान लेना। 

जब आप जीतने के बारे में सोचेंगे तो आपको एक नई शक्ति और ऊर्जा मिलेगी। आपका उत्साह बढ़ेगा। अपने काम के प्रति रुचि बढ़ेगी। आत्मविश्वास बना रहेगा। आगे बढ़ने के लिए नए-नए आइडिया आएंगे। जब आप में उत्साह बढ़ेगा तो आपके आस-पास रहने वालों में भी उत्साह बढ़ेगा। 

आपके आत्मविश्वास को देखकर सामने वाले के मन में भी आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा। जब आप जीत की सोचते हैं तो आपके अंदर असीम शक्ति और ऊर्जा का निर्माण होने लगता है। जिससे उत्साह, काम के प्रति लगाव और आत्मविश्वास पैदा होता है। नए आइडिया, आगे बढ़ने की ललक, काम करने का जुनून, साथ ही अमीर बनने की तीव्र इच्छा बढ़ जाती है।

जीत नहीं पाऊंगा यानी काम शुरू करने से पहले ही आपने हार मान ली है। जब आपने हार के बारे में सोचा है तो फिर जीतने के लिए क्या करेंगे। आपका हारना निश्चित है। क्योंकि ऐसी सोच आपके उत्साह को कम कर देती है। आप में आत्मविश्वास का अभाव दिखाई देता है। आप अमीर बनने के लिए नए आइडिया सोच ही नहीं पाते हैं, क्योंकि आपने तो पहले से ही अपने को गरीब मान लिया है। ऐसे में आप जीत नहीं पाते हैं और आपको हार का सामना करना पड़ सकता है।

 ‘हार’ शब्द निराश और असफल लोगों के लिए होते हैं। जो जीतने की सोचते हैं वही चैंपियन होते हैं। सफलता उन्हीं के कदम चूमती है। शौहरत और दौलत उन्हीं को मिलती है। इसीलिए आप भी अपने मन में हमेशा जीतने के बारे में सोचें। जीतने की सोच हमेशा आपको आगे बढ़ाएगी। जो विजेता बनते हैं वे ‘हार’ शब्द से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं रखते।

इतिहास गवाह है कि सम्राट अशोक हो या नेपोलियन, वास्कोडिगामा हो या कोलंबस, शेक्सपियर हो या प्रेमचंद, अमिताभ हो या बेहकम, संतोष यादव हो या शीतल महाजन सभी में एक बात कॉमन थी, वह थी इनके अंदर जीतने की सोच। लक्ष्य को. हासिल करने के लिए जीत का माद्दा । बनाए रखा। ऐसा ही माद्दा आप भी बनाए रख सकते हैं तो आपकी जीत सुनिश्चित है। 

एक साधारण परिवार की शीतल महाजन ने उत्तरी ध्रुव और दक्षिण ध्रुव में स्काई जम्प करके इतिहास रचा। उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव में महिलाओं को हवाई जहाज से स्काई जम्प की परमिशन नहीं थी, लेकिन शीतल महाजन ने अपने लक्ष्य को जीतने के लिए उन सभी चुनौतियों का सामना किया जो उनके लक्ष्य में बाधा उत्पन्न कर रही थीं। जीत की सोच की बदौलत वह अपने मिशन में कामयाब हुईं।

नॉर्थपोल और साउथपोल पर जम्प लगाकर शीतल महाजन ने यह साबित कर दिया कि मन में जीतने की इच्छा रखने वाले चाहे वह एक महिला ही क्यों न हो उसे सफलता जरूर मिलती है। उनकी जीतने की सोच ने उन्हें हर पल एक नया जोश और नई शक्ति दी। 

वह भारत की ही नहीं दुनिया की पहली स्काई जम्प महिला बनीं जिसने उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव में उतर कर अपना सपना पूरा किया। यह सफलता उनके जीत की सोच का परिणाम थी। अमीर बनने के लिए आप भी हमेशा अपने काम में जीतने की सोच रखें और उसे हासिल करें। 

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