अद्भुत घटनाएं-सूर्य किरणों के चमत्कार 

अद्भुत घटनाएं-सूर्य किरणों के चमत्कार 

अद्भुत घटनाएं-सूर्य किरणों के चमत्कार 

सूर्य का प्रकाश सम्पूर्ण पृथ्वी पर एक जैसा पड़ता है। किन्तु कई स्थानों पर इसका विचित्र रूप यह बतलाता है कि ये किरणें रहस्यमयी हो गई हैं। 

उदाहरण के लिए यूरोपीय देश इटली के उसेला नगर के एक विचित्र किले की वैज्ञानिक बड़ी तेजी से जांच पड़ताल कर रहे हैं। किन्तु इसके अद्भुत रहस्यों की कोई भी जानकारी नहीं मिल पा रही है। 

अद्भुत घटनाएं-सूर्य किरणों के चमत्कार 

इस किले की विचित्रता यह है कि जब सूर्योदय होने को होता है तो यह किला सम्पूर्ण दिखलाई देता है। इसी प्रकार सूर्यास्त होने से थोड़ी देर पूर्व तक भी किला सम्पूर्ण दिखलाई देता है। 

आज तक इस रहस्य का कुछ भी पता नहीं चला पाया कि आखिर ऐसा क्यो होता है। इस किले की विशेष छानबीन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य के साथ उदय या अस्त होने वाली किरणें पथ्वी पर पहंचने से पहले तारों से भरे आकाश में 10 हजार प्रकाश वर्ष तक घूम चुकी होती। 

संभव है इस घटना का सम्बन्ध इस तथ्य से ही हो, पर इसके लिए व्यक्ति को दिव्य चक्षुओं की आवश्यकता होगी। वैज्ञानिकों की इस बात पर वहां के सामान्य नागरिकों को विश्वास नहीं होता अत: तथ्य अभी भी रहस्य ही बना हुआ है। 

इसी प्रकार इटली के ही लुसेरा नामक कस्बे में एक ऐसा मकान है जिसमें कोई चिल्लाए या बात करे तो उसकी आवाज ग्यारह बार प्रतिध्वनित होती है। किन्तु सूर्यास्त के बाद आप कोई बात कहेंगे या चिल्लाएंगे तो यह प्रतिध्वनि ग्यारह बार की बजाय बारह बार प्रतिध्वनित होगी।

ऐसा किस नियम के अन्तर्गत होता है, अभी तक कौतूहल का विषय बना हुआ है। इस सम्बन्ध में सुमात्रा का भी एक उदाहरण है। यहां के क्रा’ नामक नगर में एक विचित्र कुआं है जिसके अन्दर झांकने से दर्शक को एक के स्थान पर दो प्रतिबिम्ब दिखलाई देते हैं। 

अद्भुत घटनाएं-सूर्य किरणों के चमत्कार 

प्रकाश किरणों में ऐसी अद्भुत क्षमताएं तो हैं कि वे किसी भी वस्तु का प्रतिबिम्ब कहीं से भी और कैसा भी चित्र-विचित्र बना दें, किन्तु उसके लिए तरह-तरह के त्रिपार्श्व और लेंसों का उपयोग आवश्यक है। सुमात्रा के इस विचित्र कुएं में कहीं भी तो ऐसा शीशा नहीं जड़ा है, जिसके कारण एक के स्थान पर दो प्रतिबिम्बों का अनुमान किया जा सके। 

यहां और भी अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि जो प्रतिबिम्ब दिखलाई पड़ते हैं, उनमें से एक तो दर्शक का ही होता है किन्तु दूसरा अलबत्ता किसी अन्य अपरिचित व्यक्ति का होता है।

अक्सर कहा जाता है कि प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक रचना प्रायः एक जैसी ही है। यदि कुछ अपवाद हैं तो वह युगों से चले आ रहे पूर्वजों के संस्कार-सूत्र के फलस्वरूप ऐसा होना चाहिए। 

दिन में तारे देखने की बात भी बड़ी विचित्र है। वेदन के सम्राट गेउज के उत्तराधिकारी कास्पर हासर जिसके विषय में कहा जाता है कि वह दिन में न केवल सितारे देख ही सकता था बल्कि मस्ती के साथ आसमान में नजरें गड़ाए उन तारों को सूर्य की प्रखर रोशनी में गिन भी सकता था। 

कहा जाता है कि जब वह बहुत छोटा था तभी अचानक उसका अपहरण कर लिया गया था। इस दौरान उसे लगभग 18 वर्ष तक एक अंधेरी कोठरी में रहना पड़ा था। 

हुआ यह कि एक रात वह संतरी के परामर्श पर कोठरी से भाग निकला। उस वक्त उसकी उम्र 18 वर्ष थी। असपन्व बाइबेरिया में उसने पहली बार सर्य किरणों के दर्शन किए। किन्तु तब तक उसकी अद्भुत शक्ति का विकास हो चुका था। 

कास्पर हासर विस्के इस बात का जीता-जागता प्रमाण रहा है कि मानवीय चेतना अपने मूल रूप में सप्तदर्शी सत्ता है। भले ही अज्ञानतावश प्राणी इसे संकीर्ण लघुता में डाले हुए है। 

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