Akbar birbal ki majedar kahaniyan-पंडित जी

Akbar birbal ki majedar kahaniyan

Akbar birbal ki majedar kahaniyan-पंडित जी

एक बार एक ब्राह्मण बीरबल के पास आया। वह बीरबल के पास एक अजीब सी विनती ले कर आया था। उसे पूरी उम्मीद थी कि बीरबल उसकी समस्या का कोई हल अवश्य निकाल देंगे। दरअसल बीरबल अपनी होशियार के लिए आसपास के गांवों में भी बहत मशहूर थे। गांववाले अक्सर अपनी समस्याएं ले कर उनके पास आते और उनका हल पा कर ही वापिस लौट आते।

वह आदमी चाहता था कि सभी उसे ‘पंडित जी’ कह कर बुलाएं पर वह अनपढ़ था। केवल पढ़े-लिखे लोगों को ही पंडित जी कहा जाता था। उसने बीरबल के आगे हाथ जोड़ कर कहा, “मैं आपसे विनती करता हूं।

 मेरी मदद करें। मुझे पता है कि मैं सारा जीवन कोशिश करने के बाद भी कुछ पढ़-लिख नहीं सकता पर मेरे पिता की आखिरी इच्छा यही थी कि लोग मुझे पंडित कह कर बुलाएं।” बीरबल ने उसे समझाया कि पढ़ाई करने के बाद ही वह पंडित बन सकता है पर वह मूर्ख कुछ सुनने को तैयार नहीं था। उसने एक ही रट लगा रखी थी। “मैं चाहता हूं कि लोग मुझे पंडित कह कर बुलाएं।” 

Akbar birbal ki majedar kahaniyan

बीरबल के लिए यह बड़ी विकट समस्या थी। भला वे दूसरों को यह कैसे आदेश दे सकते थे कि वे उस मुर्ख आदमी को पंडित कह कर पुकारे। तभी बीरबल को एक उपाय सूझ गया। वे उठ कर अपने नौकरों के पास गए और उन्हें कहा, “जो व्यक्ति मेरे पास आया हुआ है, जब वह यहां से बाहर जाए तो उसे रास्ते में ‘पंडित जी’ कह कर चिढ़ाना। कुछ दूरी तक यूं ही साथ चलना। अगर वह गुस्सा हो तो भी तुम उसे चिढ़ाते रहना। अगर वह तुम पर पत्थरों से वार करे तो भी तुम ऐसा ही करते रहना। जब आसपास के लोग तुम्हें ऐसा करते देख लें तो तुम वापिस आ जाना।” 

फिर वे अपने स्थान पर आए और पंडित से बोले, “आज का दिन बहुत अच्छा है। तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी होगी। लोग तुम्हें पंडित ही कहेंगे पर तुम्हें एक काम करना है। जब भी कोई तुम्हें पंडित कहे तो तुम उन पर गुस्से से चिल्लाना या पत्थर उठा कर फेंकना।” 

मूर्ख ब्राह्मण को कुछ समझ नहीं आया पर उसने ऐसा करने की हामी भर दी। पढ़ने-लिखने के मुकाबले यह काम आसान था और वह इसे आसानी से कर सकता था। रास्ते में बीरबल के नौकरों ने उसे पंडित कहा तो उसने उन पर पत्थर बरसाए और उल्टी-सीधी बातें बोलने लगा। धीरे-धीरे, पूरे नगर में यह बात फैल गई कि एक मूर्ख आदमी है जो पंडित बोलने पर चिढ़ जाता है। 

Akbar birbal ki majedar kahaniyan

आते-जाते लोग उसका मजाक उड़ाने के लिए पंडित जी कह कर बुलाते और वह ब्राह्मण झट से, वैसे ही पेश आता जैसा कि बीरबल ने करने को कहा था। जबकि उसे मन ही मन पंडित जी शब्द सुन कर बहुत खुशी होती थी। जल्दी ही सभी उसे पंडित जी कह कर ही बुलाने लगे।

कुछ समय बाद पंडित ने भी उन्हें मारना छोड़ दिया। लोग भूल गए थे कि वह मूर्ख कोई पंडित नहीं था। इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से उस मूर्ख की इच्छा पूरी कर दी। बीरबल की चतुराई ने एक मूर्ख को पंडित का संबोधन दिलवा दिया।

पंचतंत्र की कहानी

विक्रम बेताल की कहानी

मजेदार रोचक कहानियां

ज्ञानवर्धक कहानी

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

twelve − 5 =