अकबर और बीरबल के किस्से हिंदी में-बालक का रोना

अकबर और बीरबल के किस्से हिंदी में

अकबर और बीरबल के किस्से हिंदी में-बालक का रोना

एक सुबह अकबर ने अपने सभी दरबारियों व मंत्रियों को एक आपातकाल बैठक के लिए बुलवाया। सभी को दिए गए समय पर दरबार में हाजिर होना था। जब सभी अपने स्थानों पर आ कर बैठ गए तो अकबर ने देखा कि बीरबल अभी तक दरबार में उपस्थित नहीं हुए।

बादशाह ने पूछा, “बीरबल कहां हैं?” एक दरबारी ने प्रणाम करके कहा, “जहांपनाह! बीरबल ने आपको संदेश देने के लिए कहा है कि वे यहां सही समय पर नहीं आ सकेंगे। उन्हें आने में थोड़ा समय लग सकता है। “

यह सुन कर अकबर को बहुत गुस्सा आया। कुछ देर बाद बीरबल आए और अपने आसन पर बैठ गए। अकबर ने बीरबल से पूछा, “क्या तुम्हें दरबार में सही समय पर आने का आदेश नहीं मिला था?”

“क्षमा करें, महाराज! पर मेरा बच्चा बहुत रो रहा था और मुझे उसे चुप कराने में इतना समय लग गया। अन्यथा मैं सही समय पर दरबार में हाजिर हो जाता।” बीरबल बोले।

अकबर बीरबल की बात से संतुष्ट नहीं हुए। उन्हें लगा कि बीरबल इतनी खास बैठक में देर से आने के लिए झूठा बहाना बना रहे थे।

अकबर और बीरबल के किस्से हिंदी में

वे बोले, “भला बच्चे को चुप करवाना भी कोई काम है? लगता है कि तुमने बच्चे को बहलाना नहीं सीखा।”

बीरबल बोले, “महाराज! अगर आप बुरा न मानें तो आप ही सिखा दें कि यह काम कैसे करना चाहिए। अगर मैं आपसे कुछ सीख सका तो बहुत बेहतर होगा।” अकबर ने झट से हामी भर दी। सारे दरबारियों की आंखें उन पर ही टिकी थीं क्योंकि आज तक उन्होंने जहांपनाह को कभी ऐसा काम करते हुए नहीं देखा था।

अकबर ने बीरबल से कहा कि “वे किसी बच्चे की तरह जोर-जोर से रो कर दिखाएं और वे उन्हें दिखाएंगे कि किसी रोते हुए बच्चे को कैसे बहलाया जाता है।” बीरबल किसी बच्चे की तरह रोने लगे। अकबर पास आ कर बोले, “मेरे बच्चे रो क्यों रहे हो? तुम्हें क्या चाहिए?”

अकबर और बीरबल के किस्से हिंदी में

बीरबल बच्चों की तरह आवाज बना कर तुतलाते हुए बोले, “गाय! मेले को अभी एक गाय लेनी है।” अकबर को लगा कि इसमें कौन सी बड़ी बात है। उनके एक इशारे पर गाय आ गई। कुछ ही देर बाद सभी गाय के पास खड़े थे। अकबर गाय दिखा कर बोले, “ये देखो, गाय आ गई। अब रोना बंद करो।” बीरबल तो और जोर-जोर से रोने लगे। अकबर बोले, “अब क्यों रो रहे हो? क्या तुम्हें गाय पसंद नहीं आई? क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?” बीरबल बोले, “मुझे भूख लगी है। कुछ खाना है। मेले को दूध पीना है।” ।

अकबर ने बच्चे बने हुए बीरबल को चुप कराने के लिए दरबारी गिलास भी आ गया पर बीरबल का रोना नहीं थमा। अकबर ने फिर से पूछा कि अब बच्चे को क्या चाहिए। बीरबल बच्चे की तरह ठुनकते हुए बोले, “दूध नहीं पीना। ये वाला दूध गाय में वापिस डाल दो।” यह सुन कर अकबर की हंसी छूट गई। उन्होंने अपनी हार मान ली और बोले, “वाकई! एक रोते हुए बच्चे को चुप कराना या बहलाना इतना आसान नहीं होता। भाई बीरबल, तुम जीते, और मैं हारा।”

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