अजब गजब जानकारी-भारत के अलग-अलग राज्यों में ऐसे मनती है दिवाली

अजब गजब जानकारी-भारत के अलग-अलग राज्यों में ऐसे मनती है दिवाली

अजब गजब जानकारी-भारत के अलग-अलग राज्यों में ऐसे मनती है दिवाली

ऐसे मनती है देश में दिवाली 

दिवाली मतलब श्रीलक्ष्मी-गणेश पूजा और धूम-धड़ाका। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि देश के अलग-अलग राज्यों में इसे मनाने का कुछ अलग तरीका भी है ? 

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साल के आखिरी महीने खूब मौज-मस्ती से बीतते हैं। अब इन्हीं दिनों को लो। दशहरा अभी गया है और दीपावली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। तुम लोग भी दीपावली को लेकर अभी से सपने सजाने लगे होगे। घर की साफ-सफाई होगी, उस दिन ये पहनेंगे, ऐसे घर सजाएंगे, वो गिफ्ट खरीदेंगे, उसके यहां घूमने जाएंगे वगैरह। सच ही तो है कि उस दिन पूरा देश त्योहार के रंग में रंग जाता है। पर, क्या तुम्हें पता है कि पूरे देश में दीपावली पर दीये, पटाखे और पूजा-पाठ भले ही एक जैसे होते हों, कुछ मामलों में यह अलग तरह से भी मनाया जाता है।

दीपावली की कई कहानियां दीपावली मनाने के कारण को ही लो। उत्तर भारत में रहने वाले बच्चे तो यही जानते हैं कि इस दिन भगवान राम लंका विजय के बाद वापस अयोध्या पहुंचे थे। उसी की खुशी में घर, रास्तों को दीयों से सजाकर रोशन किया जाता है और पटाखे जलाकर खुशी जाहिर की जाती है। लोग सजते हैं, संवरते हैं, मिठाइयां बंटती हैं। लेकिन शायद तुम्हें पता नहीं होगा कि दक्षिण भारत में दीपावली की कथा में श्रीकृष्ण असली हीरो हैं। वहां श्रीकृष्ण के नरकासुर नामक दैत्य का वध करने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है। वहीं पश्चिम बंगाल में दीपावली की पूजा में देवी काली ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वहां की कथा के अनुसार इस दिन देवी काली ने बकासुर नामक दैत्य पर विजय पाई थी। 

तमिलनाडु में खास है नरक चतुर्दशी 

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तमिलनाडु में दीपावली प्रमुख रूप से नरक चतुर्दशी के दिन मनाते हैं। इस दिन से पहले घर को साफ-सुथरा करके रंगोली यानी कोलम से सजाया जाता है। नरक चतुर्दशी को घर के लोग 

गोवा की नरक चतुर्दशी 

दिवाली से पहले नरक चतुर्दशी को गोवा में नरकासुर नामक दैत्य के बड़े पुतले बनाए जाते हैं और उन्हें जलाया जाता है। इसके साथ ही होता है खूब सारा नाच-गाना और आतिशबाजी। 

बंगाल की काली-पूजा 

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यहां एक लक्ष्मी पूजा दशहरा के बाद पूर्णिमा को भी होती है। खास अमावस्या को काली-पूजा होती है। फिर दीपावली मनाते हैं। घर में साफ सफाई, पूजन वगैरह तो होता ही है। बंगाल में चावल को पीसकर घर के द्वार और पूजा स्थलों पर सफेद अल्पना बनाने का भी रिवाज है। 

गुजरात का नया साल दिवाली 

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गुजरात में परिवार के साथ छुट्टियां मनाने का वक्त होता है। यहां धनतेरस की पूजा का महत्व है। बहुत से लोग दिवाली को नए साल की शुरुआत मानते हैं। यहां लाभ पंचम का त्योहार बहुत धूमधाम से मनता है और इसके साथ ही दिवाली के उत्सव का समापन माना जाता है। इसे वहां लखेनी पंचमी भी बोलते हैं। यह दिवाली से पांचवें दिन यानी कार्तिक की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। दिवाली और लाभ पंचम के दिन घर को सजाया जाता है। रंगोली बनाई जाती है। यहां कुछ घरों में दिवाली की रात एक घी के दीपक पर काजल बनाने की प्रथा भी है। उसके बाद उस काजल को दूसरे दिन परिवार का हर सदस्य आंखों में लगाता है या फिर गले में टीका लगाता है। माना जाता है इससे घर में धन और सुख आता है। घरों में खास गुजराती व्यंजन श्रीखंड और शीरा बनते हैं। 

सूरज उगने से पहले उठते हैं। घर का सबसे बड़ा-बुजुर्ग घर के हर सदस्य के सिर पर तेल लगाता है। और फिर तेल मालिश करके सब स्नान करते हैं। स्नान के बाद विभिन्न पकवानों, फल, कुमकुम, चंदन पाउडर आदि से पूजा की जाती है। नाश्ते से पहले लेहियम (आयुर्वेदिक औषधि) चखा जाता है। दिवाली वाले दिन पूजा पाठ उत्तर भारत जैसा नहीं होता। 

कश्मीर की मीठी पूरियां 

कश्मीर में दीपावली का उतना ज्यादा बोलबाला नहीं होता। यहां शिव को मानने वाले ज्यादा हैं। इसीलिए दीपावली विष्णु का पर्व होने के कारण इस पर बहुत खास तैयारियां देखने को नहीं मिलती। पर फिर भी दीपावली पूरे देश का त्योहार है, इसलिए यहां भी मनाया जाता है। इस दिन खास कश्मीरी पकवान घर में बनते हैं, जिनमें मीठी पूरियां प्रमुख हैं। दीपावली की पूजा-पाठ कार्तिक मास की एकादशी से शुरू होकर अमावस्या तक चलती है। खास अमावस्या वाले दिन घर के बड़े-बुजुर्ग व्रत रखते हैं और रात को पूजन करते हैं। 

जगमगाता है स्वर्ण मंदिर

जगमगाता है स्वर्ण मंदिर

 पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की दिवाली दुनिया भर में मशहूर है। एक तो स्वर्ण मंदिर वैसे ही सुनहरा है, उस पर दिवाली में यह खूब लाइटों से सजता है। पंजाब में दिवाली का दिन 1619 में छठे गुरु हरगोबिंद साहिब के जेल से मुक्त होने से भी जुड़ा है। उन्हें जहांगीर ने कैद से मुक्त किया था। उनकी मुक्ति की खुशी में भी इस दिन स्वर्ण मंदिर को सजाया जाता है। इस दिन को वे ‘बंदी छोड़ दिवस’ के तौर पर मनाते हैं। दुनिया भर से कई लाख श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर पहुंचते हैं। घरों में इस खुशी के साथ ही लक्ष्मी-पूजन करके पटाखे आदि छुड़ाए जाते हैं। 

हिमाचल में पूजी जाती है रंगोली 

पूरे देश की तरह हिमाचल प्रदेश में भी दिवाली पटाखों, साफ सफाई, नए कपड़ों वगैरह के साथ मनाई जाती है। यहां की दिवाली में पारंपरिक रूप से पानी में भीगे चावलों को पीसकर उससे चित्र बनाए जाते हैं, जिनकी पूजा की जाती है। कुछ जगहों पर चंदन की लकड़ी से बनी देवी लक्ष्मी की मूर्ति को तांबे की प्लेट में रखा जाता है और उस पर गन्ने से मांडव बनाया जाता है। 

महाराष्ट्र की रंगोली

 महाराष्ट्र में धनतेरस से पहले वसु बरस मनाया जाता है। इस दिन गाय की पूजा का भी खास रिवाज है। इस दिन यहां गाय और बछड़े की एक साथ पूजा करते हैं। धनतेरस को बही-खाते की पूजा का दिन माना जाता है। उसके बाद नरक चतुर्दशी को भोर स्नान का खास महत्व है। घर के सभी लोग सुबह 5 बजे उठते हैं, उबटन लगाते हैं और स्नान करते हैं। दिवाली पूजन में लक्ष्मी-गणेश पूजा होती है, घर को बड़ी रंगोली से सजाया जाता है। किसी भी त्योहार में वहां पूरन पोली, रसा और कोरडई नाम के व्यंजन बनते हैं। 

राजस्थान में तला नहीं खाते 

राजस्थानी परिवारों में दिवाली वाले दिन पूजा-पाठ तो होता ही है, इस दिन राजस्थानी रिवाज के अनुसार घर में कच्चा खाना बनता है यानी तला हुआ कुछ नहीं बनता। बड़ों के पांव पूजे जाते हैं और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। 

आंध्र में होती है सत्यभामा की पूजा 

आंध्र में होती है सत्यभामा की पूजा 

आंध्र प्रदेश में दिवाली के दिन भगवान हरि की पूजा-आरती की जाती है। इस दिन हरि और सत्यभामा की कथा कही जाती है। माना जाता है कि इस दिन उन्होंने नरकासुर दैत्य को मारा था।

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