टॉनिक पीने के फायदे और नुकसान Advantages and disadvantages of drinking tonic

टॉनिक पीने के फायदे और नुकसान Advantages and disadvantages of drinking tonic                   टॉनिक का नियमित सेवन करने से सेहत बनती है? 

ग़लतफ़हमी का आधार- टॉनिक पीने के फायदे

आजकल के भाग-दौड़, चकाचौंध-भरे कृत्रिम जीवन में अपनी तंदुरुस्ती कायम रखने और सेहत बनाने के लिए लोग टॉनिक के नाम से मिलने वाली रंगबिरंगी गोलियों, कैप्सूलों और सीरप की शीशियों में पैक दवाओं पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं। उनका मानना है कि इनके नियमित सेवन करने से शरीर में शक्ति और उत्साह पैदा होकर सेहत बनती है।

वास्तविकता

सच्चाई तो यह है कि इन टॉनिकों से उतना फायदा नहीं होता है, जितना इनका प्रचार किया जाता है। दूसरे, यदि कुछ फायदा होता भी है, तो उसके ढेर सारे दुष्प्रभाव भी होते हैं। आवश्यकता से अधिक सेवन किए गए विटामिंस, हार्मोंस, आयरन, ग्लिसरोफास्फेट्स, अल्कोहल से विषाक्त लक्षण भी पैदा हो सकते हैं। 

टॉनिक अधिक मात्रा में लेने से नुकसान

विटामिन ‘ए’ की अधिक मात्रा निरंतर लेते रहने से ‘हाइपर विटामिनोसिस ए’ रोग होने से गुर्दे और तिल्ली क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। हड्डियों में धीरे-धीरे सूजन बढ़ती चली जाती है और उनकी क्षति होने लगती है। बाद में भूख न लगना, अपच, अनिद्रा, घबराहट की शिकायतें होने लगती हैं। 

लुधियाना के एक विशेषज्ञ द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार पानी में घुलने वाले विटामिन जैसे-बी कांपलेक्स और विटामिन सी स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी करते हैं। विटामिन बी-1 से एलर्जी, अनिद्रा, सिर दर्द और हृदय की धड़कन में तेजी जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इसी प्रकार विटामिन बी-3 के अधिक उपयोग से दस्त लगना, शरीर में पानी जमा होना या न्यूरो मस्क्यूलर अवरोध हो जाता है। विटामिन बी-6 की अधिक मात्रा सेवन करने से नाड़ी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। गर्भवती महिलाओं को गर्भपात होने का खतरा भी हो सकता है। 

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलीफोर्निया के एक अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार 500 मिलीग्राम विटामिन सी का प्रतिदिन सेवन करने वाले अधेड़ उम्र के लोगों के हृदय की धमनियां सामान्य की तुलना में ढाई गुना तेजी से मोटी होती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान करने वालों के मामले में यह दर पांच गुनी तेज थी। विटामिन सी का काम कोशिकाओं को नष्ट होने से रोकना है, लेकिन हारवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डॉ. मीर स्टेफर के अनुसार लौह तत्वों की उपस्थिति में विटामिन सी कोशिकाओं को नष्ट भी कर सकता है। इसके अलावा मूत्र में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। यहां तक कि गुर्दे में पथरी बन सकती है। 

इसी प्रकार विटामिन ‘डी’ की अधिकता से गुर्दे में पथरी, उलटी, मितली, पेट में दर्द, प्यास की अधिकता, भूख की कमी और कब्जियत की शिकायत उत्पन्न होने लगती है। विटामिन ‘ई’ की अधिक मात्रा सेवन करने से शरीर की विटामिन ‘ए’ तथा ‘के’ को सोखने की क्षमता कम हो जाती है। इससे रक्त का पतला होना और असामान्य रक्तस्राव होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मितली, सिर दर्द, चक्कर आने की शिकायतें होती हैं। 15 मिलीग्राम फोलिक एसिड अगर रोज खाया जाए, तो इससे चिड़चिड़ापन तथा अनिद्रा रोग हो जाता है। नायसिन के अधिक प्रयोग से उलटी, पेट दर्द और दस्त की शिकायतें सामने आई हैं। अगर दमा के मरीज को यह दिया जाए, तो सांस लेने में कठिनाई होती है। इसके अलावा यकृत के रोग तथा त्वचा पर खुजली आदि का खतरा भी रहता है। 

फिनलैंड के कुओपिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मतानुसार शरीर में एकत्रित लौह की अधिक मात्रा हृदय के लिए घातक हो सकती है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार हृदयाघात का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान माना जाए, तो दूसरा बड़ा कारण शरीर में एकत्रित लौह है। शरीर में लौह तत्व ज्यादा होने से हीमोक्रोमेटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। इसके अलावा सिरोसिस ऑफ लीवर, गठिया, शुक्राणुओं की कमी, हाजमा बिगड़ना, आमाशय में पीड़ा, वमन आदि तकलीफें भी हो सकती हैं।

हार्मोंस की अधिकता से नुकसान

ग्लिसरोफास्फेट्स के विषाक्त लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं। आमाशय व आंत्र शोथ तथा यकृत की विकृति ग्लिसरोफास्फेट्स के आधिक्य से होती है। हार्मोंस के अधिक प्रयोग करने से महिलाओं को दाढ़ी-मूंछ आना। भूख बढ़ाने में स्ट्रिकनीन का प्रयोग करने से शारीरिक दुष्प्रभाव। वजन बढ़ाने के लिए एनाबलिक स्टेरायड लेने से गुर्दे संबंधी अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। अधिक मात्रा में कैल्शियम लेते रहने से किडनी में पथरी होने का खतरा पैदा हो जाता है। जिंक की अधिकता से पेट में दर्द, गैस की तकलीफ, प्रतिरोधक क्षमता में कमी, उलटी होना, किडनी फेल होना आदि दुष्परिणाम हो सकते हैं। अतः बिना आवश्यकता के एवं बगैर डॉक्टरी परामर्श के टॉनिकों का नियमित सेवन न करें।

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