परमाणु संरचना के प्रथम ज्ञाता वैज्ञानिक आचार्य कणाद की जीवनी

परमाणु संरचना के प्रथम ज्ञाता वैज्ञानिक आचार्य कणाद की जीवनी

परमाणु संरचना के प्रथम ज्ञाता वैज्ञानिक आचार्य कणाद की जीवनी-ACHARYA KANAD ki jivani

परमाणु संरचना पर सर्वप्रथम प्रकाश डालने वाले महापुरुष आचार्य कणादि का जन्म 600 ईसा पूर्व हुआ था। उनका नाम आज भी डाल्टन के साथ जोड़ा जाता है, क्योंकि पहले कणादि ने बताया था कि पदार्थ अत्यन्त सूक्ष्म कणों से बना हुआ है। उनका यह विचार दार्शनिक था, उन्होंने इन सूक्ष्म कणों को परमाणु नाम दिया। बाद में डाल्टन ने परमाणु का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। परमाणु को अंग्रेजी भाषा में एटम कहते हैं। 

कणादि का कहना था–“यदि किसी पदार्थ को बार-बार विभाजित किया जाए और उसका उस समय तक विभाजन होता रहे, जब तक वह आगे विभाजित न हो सके, तो इस सूक्ष्म कण को परमाणु कहते हैं। परमाणु स्वतन्त्र रूप से नहीं रह सकते। परमाणु का विनाश कर पाना भी सम्भव नहीं है।” । 

उन्होंने बताया था “विशेष परिस्थितियों में परमाणु एक-दूसरे से संयुक्त हो सकते हैं। एक तरह के दो परमाणु मिलने से एक ऐसा अणु बनता है, जिसके गुण मिलने वाले परमाणुओं जैसे होते हैं। भिन्न-भिन्न पदार्थों के परमाणु भी भारी संख्या में एक-दूसरे के साथ मिल जाते हैं।” 

उनके अनुसार-“जिस तरह पदार्थ के कई प्रकार होते हैं, इसी तरह परमाणु के भी कई रूप होते हैं। पृथ्वी, जल, वायु और आग के परमाणु अलग-अलग होते हैं।” 

कणादि ने रासायनिक परिवर्तन के विषय में भी विचार प्रस्तुत किए। उनका कथन था- 

“गरम करने पर परमाणुओं के गुण बदल जाते हैं।” । 

गरमी के प्रभाव से होने वाले अनेक परिवर्तनों के भी उन्होंने अनेक उदाहरण दिए। 

कणादि के अनुसार संसार में जो कुछ भी दृष्टिगोचर होता है, वह परमाणु की विभिन्नता और विचित्रता के कारण ही होता है। गर्मी की प्रतिक्रियाओं से अनेक परिवर्तन होते हैं। 

कणादि वास्तव में अपने समय के महान दार्शनिक व वैज्ञानिक थे।

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