5जी प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन |5G टेक्नोलॉजी UPSC

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5जी प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन | 5G टेक्नोलॉजी UPSC

क्या आप सभी को मालूम है कि 5जी प्रौद्योगिकी बहुत जल्द ही भारत में अपनी पैठ बनाने जा रही है? जी हाँ, यह बिल्कुल सच है. भारत के शीर्ष स्मार्टफोन निर्माताओं ने तो इसके स्वागत में 5जी क्षमता-युक्त फोन भी जारी कर दिए हैं. 117 करोड़ से अधिक दूरसंचार उपयोगकर्ताओं और 82 करोड़ से अधिक इंटरनेट ग्राहकों के साथ, भारत डिजिटल उपभोक्ताओं के लिए सबसे तेजी से विकास करते बाजारों में से एक है. भौतिक और पारम्परिक अवसंरचनाओं के साथ समेकित रूप से एकीकृत डिजिटल अवसंरचना भारत की विकास गाथा और आत्मनिर्भरता की ओर देश की तेज बढ़त के लिए महत्वपूर्ण है, ‘डिजिटल इंडिया’ परियोजना को समावेशी बनाने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है. इसके साथ ही, देश के दूरस्थ हिस्सों तक में ऑप्टिकल फाइबर का व्यापक उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि कोई भी इस प्रयास में पीछे न छूट जाए. 

इस सन्दर्भ में 5जी और ऑप्टिकल फाइबर की बुनियादी बातों से अवगत होना हमारे लिए प्रासंगिक होगा. 5जी, नेटवर्क 5वीं पीढ़ी का मोबाइल नेटवर्क है. यह 1जी, 2जी, 3जी और 4जी नेटवर्क के बाद नवीनतम वैश्विक वायरलेस मानक है. 5जी नेटवर्क 3 बैंड (लो, मिड और हाई फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम) में कार्य करता है, जिनमें से सभी के अपने अलग-अलग उपयोग और अपनी सीमाएं हैं, यह एक नए प्रकार के नेटवर्क को सक्षम बनाता है जिसे मशीनों, वस्तुओं और उपकरणों सहित लगभग सभी को एक साथ जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. भारत में सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन-इंडिया ने 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी में मिलीमीटर बैंड को शामिल करने की सरकार की योजना पर चिंता व्यक्त की है. 

5जी प्रौद्योगिकी से अनेक लाभ हैं 

1.उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड-हमारे स्मार्टफोन को बेहतर बनाने के अलावा 5जी मोबाइल प्रौद्योगिकी तेज गति, अधिक समरूप डेटा दर, निम्न लेटेंसी और निम्न प्रति बिट लागत के साथ वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसे नए इमर्सिव अनुभवों की शुरूआत कर सकती है, 

2.हाई-स्पीड प्रोद्योगिकी-5जी मोबाइल । नेटवर्क, डाउनलोडिंग और अपलोडिंग स्पीड को बढ़ा देगा. 5जी के हाई-बैंड स्पेक्ट्रम में इंटरनेट की गति परीक्षण स्तर पर 20 गीगाबिट प्रति सेकण्ड तक उच्च पाई गई. इसकी तुलना में 4जी की अधिकतम इंटरनेट डेटा गति : 1 जीबीपीएस दर्ज की गई थी. 5जी लेटेंसी या विलम्बता, नेटवर्क द्वारा प्रतिक्रिया देने में लगने । वाला समय, को भी कम करेगा. 

3.मशीन-टू-मशीन इंटरेक्शन-5जी मशीन-टू-मशीन संचार की सुविधा प्रदान करने वाली पहली प्रौद्योगिकी होगी, जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स की नींव है. 

IoT, क्लाउड, बिग डेटा, AI और एज कम्प्यूटिंग के साथ 5G चौथी औद्योगिक क्रांति का एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक सिद्ध हो सकता है, 

4.अर्थव्यवस्था को बढ़ावा-सरकार द्वारा नियुक्त पैनल (वर्ष 2018) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 5जी वर्ष 2035 तक भारत में 1 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर का संचयी आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है… 

यह मशीनों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाकर भारत को व्यापक रूप से आर्थिक बढ़ावा देगा, दक्षता में वृद्धि करेगा तथा उत्पादन में भी वृद्धि होगी जिससे भारी राजस्व संग्रह प्राप्त होगा. 

5.सहयोगी नेटवर्क परिनियोजन-5जी के कारण ऐसा पहली बार होगा कि नेटवर्क परिनियोजन के लिए व्यावसायिक कार्यक्षेत्र और प्रौद्योगिकी कार्यक्षेत्र एक साथ कार्य करेंगे. पहले दूरसंचार आन्तरिक चर्चा करता था और नेटवर्क तैनात करता था, लेकिन अब व्यवसाय, प्रौद्योगिकी कम्पनियाँ और साइबर विशेषज्ञ नेटवर्क की तैनाती के लिए एक साथ आएंगे. ऑप्टिकल फाइबर किस प्रकार लाभ की । मात्रा निर्धारित कर सकता है? 

6.हाई स्पीड-फाइबर अधिक बैंडविड्थ प्रदान करता है और 10 Gbps और उससे अधिक तक मानकीकृत प्रदर्शन करता है, ताँबे के उपयोग के साथ इसे प्राप्त कर सकना असम्भव है. अधिक बैंडविड्थ का मतलब है कि फाइबर, ताँबे के तार की तुलना में, कहीं अधिक दक्षता के साथ अधिक सूचनाओं का वहन कर सकता है. 

7.ट्रांसमिशन की रेंज-चूँकि फाइबर ऑप्टिक केबल्स में डेटा प्रकाश के रूप में गुजरता है, ट्रांसमिशन के दौरान अत्यंत कम सिग्नल हानि होती है और डेटा उच्च गति से तथा अधिक दूरी तक स्थानांतरित हो सकता है, 

8.स्थायित्व-फाइबर ऑप्टिक केबल उन विभिन्न पर्यावरणीय कारकों से अप्रभावित रहता है, जो कॉपर केबल को प्रभावित करते हैं, 

कोर काँच से बना होता है, जो एक कुचालक/इन्सुलेटर है, इसलिए इससे कोई विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं हो सकती है.

ऑप्टिकल फाइबर डिजिटल अवसंरचना की रीढ़ है; डेटा पतले फाइबर के लम्बे स्टैंड के माध्यम से यात्रा करने वाले प्रकाश-स्पंदों (Light Pulses) द्वारा प्रेषित होता है, फाइबर कम्युनिकेशन में संचरण के लिए धातु के तारों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इसमें सिग्नल कम हानि के साथ यात्रा करते हैं, ऑप्टिकल फाइबर पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflection-TIR) के सिद्धांत पर कार्य करता है, प्रकाश किरणों का उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा संचारित करने के लिए किया जा सकता है (बिना किसी मोड़ के लम्बे सीधे तार के मामले में). यदि तार में मोड़ हो, तो ऑप्टिकल केबलों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे सभी प्रकाश किरणों को अन्दर की ओर मोड़ते हैं (TIR का उपयोग कर). 

चुनौतियाँ हैं 

1.निम्न ‘फाइबराइजेशन फुटप्रिंट’ भारत में फाइबर कनेक्टिविटी को अपग्रेड करने की आवश्यकता है, जो वर्तमान में भारत के केवल 30% दूरसंचार टावरों को संयुक्त करता है, भारत ने अप्रैल 2020 और नवम्बर 2021 के बीच 132 से अधिक देशों को 138 मिलियन डॉलर के ऑप्टिकल फाइबर का निर्यात किया. भारतीय ऑप्टिकल फाइबर केबल की खपत वर्ष 2021 में 17 मिलियन फाइबर किमी से बढ़कर वर्ष 2026 तक 33 मिलियन फाइबर किमी हो जाने का अनुमान है. लगभग 30% मोबाइल टावरों में ही फाइबर कनेक्टिविटी है: इसे कम-से-कम 80% तक बढ़ाने की जरूरत है. 

2.अन्य देशों द्वारा डंपिंग-चीन, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत में अपने फाइबर उत्पादों को बाजार मूल्य से कम दरों पर डंप कर रहे हैं. विश्व व्यापार संगठन ‘डंपिंग’ को एक ऐसे अन्तर्राष्ट्रीय मूल्य भेदभाव की स्थिति के रूप में परिभाषित करता है जिसमें आयातक देश में पेश किए गए उत्पाद की कीमत निर्यातक देश के बाजार में उस उत्पाद की कीमत से कम होती है, 

3.इष्टतम 5G प्रौद्योगिकी मानक का चयन-5G प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए घरेलू 5G मानक और वैश्विक 3GPP मानक के बीच टकराव को समाप्त करने की आवश्यकता है. 5G के अपने स्पष्ट लाभ हैं, लेकिन यह टेलीकॉम के लिए 5G इंडिया की लॉन्च की लागत बढ़ाता है साथ ही, इंटरऑपरेबिलिटी समस्याएं भी उत्पन्न करता है. 3GPP रेडियो एक्सेस प्रौद्योगिकियों और ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस निर्देशों के आधार पर वैश्विक मोबाइल 3G वायरलेस सिस्टम को औपचारिक रूप प्रदान करने के लिए दूरसंचार उद्योग भागीदारों (संगठनात्मक भागीदारों) के बीच सम्पन्न एक सहयोगी परियोजना समझौता है. 

4.’मेक इन इंडिया’ हार्डवेयर चुनौती- कुछ विदेशी दूरसंचार मूल उपकरण निर्माताओं -जिन पर अधिकांश 5G प्रौद्योगिकी विकास निर्भर करता है, पर प्रतिबंध स्वयं में एक अवरोध उत्पन्न करता है, 

5.कम सरकारी सब्सिडी-मौजूदा राजकोषीय घाटे के बीच स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए सरकारों द्वारा निर्धारित उच्च आरक्षित मूल्यों के अतीत को देखते हुए सरकारी सब्सिडी की सम्भावना बेहद कम है. 

6.स्वास्थ्य और पर्यावरणीय असफलताएं- मानव स्वास्थ्य पर 5जी और निम्न तीव्रता के रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक चुम्बकीय क्षेत्र विकिरण के प्रभाव और इसके पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा चिंता व्यक्त की गई है, कहा गया है कि वायरफ्री गैजेट्स और नेटवर्क सेल टावरों से 5जी प्रौद्योगिकी और सम्बद्ध आर एफ विकिरण लोगों और पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य और सेहत के लिए बेहद खतरनाक और हानिकारक होगा,

डिजिटल समावेशन के सम्बन्ध में भारत की पहल 

1.भारतनेट-यह ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग करने वाला विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन है. 

यह राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी में डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने हेतु एक उच्च मापनीय नेटवर्क अवसंरचना है जिसे गैर-भेदभावपूर्ण आधार पर सभी घरों के लिए 2 एमबीपीएस से 20 एमबीपीएस तथा सभी संस्थानों को उनकी माँग क्षमता के अनुसार सस्ती ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए एक्सेस किया जा सकता है. इसे संचार मंत्रालय के तहत् दूरसंचार विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, 

2.राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन-राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन देश भर में, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए सार्वभौमिक और समान पहुँच को सुविधाजनक बनाएगा. मिशन का उद्देश्य डिजिटल विभाजन को दूर करना, डिजिटल सशक्तिकरण एवं समावेशन की सुविधा प्रदान करना और सभी के लिए ब्रॉडबैंड तक सस्ती एवं सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना है. 

3.घर तक फाइबर योजना-घर तक फाइबर योजना बिहार के सभी 45,945 ग्रामों को हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का लक्ष्य रखता है. योजना के तहत् बिहार को प्रति ग्राम कम-से-कम पाँच फाइबर-टू-द-होम कनेक्शन और प्रति ग्राम कम-से-कम एक वाई-फाई हॉटस्पॉट प्रदान करना है. यह योजना बिहार में ई-शिक्षा, ई-कृषि, टेली-मेडिसिन, टेली-लॉ जैसी डिजिटल सेवाओं और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का नेतृत्व करेगी तथा राज्य के सभी निवासियों के लिए आसान पहुँच सुनिश्चित करेगी.यह भारतनेट पहल के कार्यान्वयन के साथ स्थानीय कर्मियों की भर्ती कर स्थानीय रोजगार सृजन को भी बढ़ावा दे सकेगी. 

5जी प्रौद्योगिकी की आगे की राह हेतु निम्नलिखित प्रयास किए जाने चाहिए 

1.एंटी-डंपिंग शुल्क -भारत को चीन, इंडोनेशिया आदि देशों से सस्ते फाइबर उत्पादों के आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क अधिरोपित करना चाहिए. 

2.उत्पादन-सम्बद्ध प्रोत्साहन-ऑप्टिकल फाइबर के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार को एक उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन योजना शुरू करने पर विचार करना चाहिए, जो घरेलू इकाइयों में निर्मित ऑप्टिकल फाइबर से बिक्री में वृद्धि पर कम्पनियों को प्रोत्साहन देने पर लक्षित हो. 

3.ग्रामीण-शहरी अंतराल को दूर करना-5जी को अलग-अलग बैंड स्पेक्ट्रम पर तैनात किया जा सकता है और निम्न बैंड स्पेक्ट्रम पर रेंज काफी लम्बी होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मददगार होती है. 

4.सरकार की ओर से सहायता-इनपुट पर सरकार का पूरा नियंत्रण है. 5जी के प्रमुख इनपुट में से एक बैंड स्पेक्ट्रम है. स्पेक्ट्रम के डिजाइन का प्रबंधन कर सरकार लोगों द्वारा भुगतान किए जाने वाले मूल्य को नियंत्रित कर सकती है. सरकार को दूरसंचार कम्पनियों को ऐसे नेटवर्क शुरू करने में सहायता करनी चाहिए,जो लोगों के लिए वहनीय और संवहनीय हो. 

5.उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से व्यवहार्य प्रौद्योगिकी-व्यापक 5जी परिनियोजन के लिए इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की आवश्यकता है अन्यथा ग्रामीण एकीकरण एक कोरा स्वप्न ही रह जाएगा.इसके साथ ही, 5जी प्रौद्योगिकी को दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए भी व्यवहार्य होना चाहिए 

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