दूसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

दूसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

अन्तर्राष्ट्रीय लेख –द्वितीय भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 

नॉर्डिक देशों के साथ भारत का दूसरा शिखर सम्मेलन 4 मई, 2022 को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में सम्पन्न हुआ.इससे पूर्व प्रथम भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2018 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित हुआ था.इस शिखर सम्मेलन ने 2018 के स्टॉकहोम में आयोजित पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद से दोनों पक्षों के सम्बन्धों में हुई प्रगति की समीक्षा करने का असवर प्रदान किया. विदित है कि पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के कुछ समय बाद ही विश्व को कोविड 19 की महामारी से जूझना पड़ा, जिसके कारण पूरे विश्व समुदाय के आपसी सम्बन्धों में एक तरह की स्थिरता आ गई थी. द्वितीय शिखर सम्मेलन में महामारी के बाद आर्थिक सुधार, जलवायु परिवर्तन, सतत् विकास, नवाचार, डिजिटलीकरण, स्वच्छ ऊर्जा आदि क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग, अन्तर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा सहित अनेक वैश्विक एवं द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भागीदारी 

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दूसरी बार भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया. इस शिखर सम्मेलन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री सुश्री मेटे फ्रेडरिक्सन, आइसलैण्ड की प्रधानमंत्री सुश्री कैटरीन जैकब्सडॉटिर, नॉर्वे के प्रधानमंत्री श्री जोनास गहर स्टोर, स्वीडन की प्रधानमंत्री सुश्री मैग्डेलेना एंडरसन और फिनलैंड की प्रधानमंत्री सुश्री सना मारिन ने भाग लिया. 

शिखर सम्मेलन में स्थायी महासागर प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए समुद्री क्षेत्र में सहयोग पर व्यापक वार्ता हुई. प्रधानमन्त्री मोदी ने नॉर्डिक कम्पनियों को भारत की सागरमाला परियोजना सहित जल से जुड़ी अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनोमी) के क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया. इस सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के मध्य आर्थिक सुधार और जलवायु परिवर्तन पर कई समितियों का गठन भी हुआ, नॉर्डिक देशों ने नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में इन देशों में बहुत काम हुआ है. सम्मेलन में नवीकरण ऊर्जा की तकनीकों के सम्बन्ध में बात हुई. साथ ही स्वास्थ्य और जल निकायों के निर्माण में सहयोग को भी लेकर भी नॉर्डिक देशों के साथ बातचीत हुई. 

नॉर्डिक शिखर सम्मेलन को लेकर भारत बहुत ही गम्भीर और उत्सुक रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ी उत्सुकता के साथ इस सम्मेलन में प्रतिभाग किया. साथ ही अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने नॉडिक देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी की. प्रधानमंत्री ने अपनी डेनमार्क यात्रा को उत्पादक बताते हुए कहा कि “मेरी डेनमार्क यात्रा उत्कृष्ट रूप से उत्पादक रही. कार्यक्रमों में राजनयिक बैठकों से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया गया, जो भारतीय समुदाय के साथ सांस्कृतिक और वाणिज्यिक सम्बन्धों और जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं. मैं पीएम फ्रेडरिक्सन, सरकार और डेनमार्क के लोगों को धन्यवाद देता हूँ” 

प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्डिक देशों के साथ हुए सम्मेलन के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि “भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ने नॉर्डिक राष्ट्रों के साथ सम्बन्धों को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक शानदार मंच दिया. नॉर्डिक देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी उत्पादक थीं. मैं समृद्धि को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूँ.” प्रधानमंत्री के वक्तव्य से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्तमान परिदृश्य में नॉर्डिक देश भारत के लिए कितना महत्व रखते हैं. नॉर्डिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का सर्मथन किया, विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने इस शिखर सम्मेलन को नॉर्डिक देशों के साथ सम्बन्धों के नए आयाम का दिन कहा, नॉर्डिक देश हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी हैं. सुशासन, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, समुद्री समाधान, बंदरगाह, जल-प्रबन्धन, सतत् विकास, आधुनिकीकरण, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, जीव विज्ञान और कृषि जैसे क्षेत्रों में नौडिक समाधान उपयोगी हो सकते हैं |

भारत के लिए नॉर्डिक देशों का महत्व 

भारत का नॉर्डिक देशों से सम्बन्ध बहुत पुराना है, यद्यपि स्वतंत्रता के बाद ही इन देशों से राजनयिक सम्बन्ध भी स्थापित हो गए थे, .. किन्तु सम्बन्धों में बहुत अधिक विस्तार नहीं हुआ था, वर्तमान में भारत एवं नॉर्डिक देशों के सम्बन्ध तीव्र गति से प्रगाद हो रहे हैं और विगत कुछ वर्षों में वे एक-दूसरे के काफी करीब आए हैं, वर्ष 2018 में स्टॉकहोम में हुए प्रथम भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद से दोनों के सम्बन्ध और तेजी से बढ़े हैं, भारत और नॉर्डिक देश मजबूत व्यापारिक साझेदारी के हिस्से हैं. भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सलाना व्यापार 13 अरब डॉलर तक पहुँच गया है. नॉर्डिक देश भारत के लिए स्थिरता, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटलीकरण और नवाचार में महत्वपूर्ण भागीदार हैं, दोनों पक्षों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों यथा-हरित साझेदारी, डिजिटल और नवाचार अर्थव्यवस्था, व्यापार व निवेश, सतत् विकास तथा आर्कटिक क्षेत्र की पहचान की गई है.

नॉर्डिक देशों के लिए भारत का महत्व 

एक तरफ जहाँ भारत के लिए नॉर्डिक देश विशेष महत्व रखते हैं वहीं भारत भी नॉर्डिक देशों के लिए एक खास अहमियत रखता है. अमरीका के अतिरिक्त भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसका नॉर्डिक देशों के साथ शिखर सम्मेलन होता है. नॉर्डिक देश भारत को विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के कारण एक अवसर के रूप में देखते हैं. नॉर्डिक देशों के लिए भारत के महत्व को इस बात से भी जाना जा सकता है कि डेनमार्क की महारानी मार्गरेट द्वितीय ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन किया. कोपेनहेगन के ऐतिहासिक एमैलियनबर्ग पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी का शाही स्वागत किया गया. इस दौरान डेनमार्क के क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक एवं क्राउन प्रिंसेज मैरी भी उपस्थित रहीं. डेनमार्क की महारानी ने महारानी के रूप में 50 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया है. राजसत्ता में महारानी की गोल्डन जुबली के अवसर पर प्रधानमन्त्री मोदी ने उन्हें सम्मानित किया और गुजरात की मशहूर रोगन पेंटिंग भेंट की तथा प्रधानमंत्री ने क्राउन प्रिंस एवं क्राउन प्रिंसेज को भी कलाकृतियाँ भेंट की. 

भारत नॉर्डिक देशों के लिए विशाल बाजार उपलब्ध कराता है. नॉर्डिक देश भारत में ब्लू इकॉनमी, हरित ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता व उभरती प्रौद्योगिकी, दूरसंचार व बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले विशाल अवसरों का लाभ उठा सकते हैं. भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की आर्कटिक नीति आर्कटिक क्षेत्र में भारत-नॉर्डिक सहयोग के विस्तार के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान करती है. साथ ही, उन्होंने नॉर्डिक कम्पनियों को भारत की सागरमाला परियोजना में निवेश करने के लिए भी आमंत्रित किया.

रूस-यूक्रेन युद्ध और नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 

द्वितीय भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन एक ऐसे दौर में हुई जब रूस-यूक्रेन विवाद के कारण विश्व युद्ध के बादल मँडरा रहे थे. यूक्रेन विवाद ने एक बार फिर से रूस और पश्चिमी देशों के सम्बन्धों को तनावपूर्ण बना दिया है. इस विवाद में पश्चिमी देशों ने यूक्रेन का पक्ष लिया है और रूस की निंदा की है, नाटो भी पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार है और वह यूक्रेन की मदद भी कर रहा है, लेकिन अभी तक नाटो ने प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में भाग नहीं लिया है, अगर रूस-यूक्रेन विवाद में नाटो शामिल होता है, तो नि सन्देह युद्ध का दृश्य बहुत भयानक होगा और इसे वैश्विक युद्ध में परिणित होने से नहीं रोका जा सकता. 

नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के नेताओं ने यूकेन संकट के क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की तथा मानवीय संकट पर अपनी गम्भीर चिंता प्रकट करते हुए रूसी सेनाओं द्वारा यूक्रेन के नागरिकों को निशाना बनाए जाने की निंदा की. नॉर्डिक देशों ने रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ गैर-कानूनी और अकारण अक्रामकता की कड़ी निंदा करते हुए दोनों पक्षों के बीच विद्यमान शत्रुता को समाप्त करने की बात कही. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समकालीन वैश्विक व्यवस्था, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अन्तर्राष्ट्रीय कानून, सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखण्डता के सम्मान पर आधारित है, का पूर्णतः पालन किया जाए. 

शिखर सम्मेलन का संयुक्त घोषणा पत्र 

भारत एवं नॉर्डिक देशों के मध्य 4 मई, 2022 को कोपेनहेगन में सम्पन्न शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया. संयुक्त घोषणा-पत्र के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं- 

शिखर सम्मेलन के दौरान सभी देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत किए जाने का संकल्प लिया, 

सम्मेलन में नेताओं ने यूक्रेन में जारी संघर्ष, बहुपक्षीय सहयोग, नवाचार, डिजिटलीकरण, हरित संक्रमण, जलवायु परिवर्तन और नीली अर्थव्यवस्था सहित अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा किया.

प्रधानमंत्रियों ने समावेशी एवं सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक प्रेरक के रूप में मुक्त व्यापार के महत्व की पुष्टि की.

नॉर्डिक प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेनाओं द्वारा किए गए गैर-कानूनी और अकारण आक्रमण की कड़ी निंदा की.

प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन में उत्पन्न मानवीय संकट के बारे में अपनी गम्भीर चिंता व्यक्त की और वहाँ पर नागरिकों के मारे जाने की खुले शब्दों में निंदा की. साथ ही उन्होंने शत्रुतापूर्ण कार्रवाई को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता दोहराई और संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अन्तर्राष्ट्रीय नियमों तथा सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के आधार पर समकालीन वैश्विक व्यवस्था के संचालन पर बल दिया.

प्रधानमंत्रियों ने बहुपक्षवाद और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, उन्होंने जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी, जैव विविधता के क्षरण तथा पूरे विश्व में बढ़ती खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग, सामूहिक प्रयास व वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया.

भारत और नॉर्डिक देशों ने इस बात पर जोर दिया कि अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थाओं का संचालन नियमों के आधार पर होना चाहिए. संस्थाओं को अधिक समावेशी, पारदर्शी व जवाबदेह बनाया जाए तथा सुरक्षा परिषद् सहित संयुक्त राष्ट्र में सुधार की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने विश्व व्यापार संगठन में सुधार एवं वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर सहयोग को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया नॉर्डिक देशों ने इसके साथ ही सुरक्षा परिषद् में सुधार और उसके विस्तार तथा सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया.

प्रधानमंत्रियों ने पेरिस समझौते, आगामी वैश्विक जैव विविधता ढाँचे और संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की. प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री से नीचे रखने के लिए त्वरित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर कॉप 26 में किए गए अन्तर्राष्ट्रीय समझौते का स्वागत किया और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री के स्तर तक सीमित करने के प्रयासों का अनुसरण किया. भारत और नॉर्डिक देश अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा विविधीकरण, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा दक्षता पर महत्वाकांक्षी सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं,

शिखर सम्मेलन में नेताओं ने स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु और चक्रीय अर्थव्यवस्था सहित पर्यावरणीय स्थिरता पर सहयोग हेतु चर्चा की, जो न केवल जैव विविधता को बनाए रखने और उसका सर्मथन करने, बल्कि खाद्य सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य और समृद्धि के आधार के रूप में महत्वपूर्ण है, भारत और नॉर्डिक देश जैव विविधता पर कुनमिंग चीन में आयोजित होने वाले जैव विविधता कन्वेंशन (सीओपी 15) के आगामी दूसरे भाग में महत्वाकांक्षी ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क पोस्ट 2020 को अपनाने और इसके कार्यान्वयन में एक साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

सम्मेलन में प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सतत् प्रबन्धन से नीली अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास, नई नौकरियों के अवसर, बेहतर पोषण और खाद्य सुरक्षा प्रदान कर सकती है, प्रमुख महासागरीय राष्ट्र के रूप में, भारत और नॉर्डिक देशों ने अच्छे आचरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से जहाजरानी उद्योग को कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य की ओर ले जाने के लाभों में भागीदारी बनने पर सहमति व्यक्त की, साथ ही नेताओं ने समुद्री, जलीय और अपतटीय पवन क्षेत्रों सहित भारत और नॉर्डिक देशों में महासागरीय उद्योगों में व्यापार सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की,

भारत और नॉर्डिक देश 2024 तक कार्य पूर्ण करने की महत्वाकांक्षा के साथ प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण महासभा के पाँचवें सत्र (यूएनईए-5.2) में एक अन्तर्राष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता करने के लिए ‘एण्ड प्लास्टिक पॉल्यूशन टूवर्ड्स ए इंटरनेशनल बाइंडिंग इंस्ट्रूमेंट’ नाम से लिए गए ऐतिहासिक ‘निर्णय का पालन किए जाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की.

शिखर सम्मेलन ने नवाचार और डिजिटल पहल के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया. सार्वजनिक, निजी और अकादमिक क्षेत्र में एक व्यापक सहयोग की विशेषता वाले नवाचार प्रणालियों के लिए नॉर्डिक दृष्टिकोण पर चर्चा की गई. भारत और नॉर्डिक देशों ने एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में लीडरशिप गुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (लीडआईटी) के साथ हरित प्रौद्योगिकियों और उद्योग संक्रमण के महत्व पर जोर दिया.

व्यापार को बढ़ाने के लिए विमानन क्षेत्र में अनुभवों और ज्ञान के आदान-प्रदान, समुद्री क्षेत्र की समस्याओं का समाधान और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण सहित सभी तरह की परिवहन प्रणालियों पर ध्यान दिए जाने की आवयश्कता महसूस की गई. सम्मेलन में खाद्य प्रसंस्करण और कृषि तथा स्वस्थ परियोजनाओं के क्षेत्रों में नवीन अवसरों की पहचान के साथ अभिनव और टिकाऊ समाधानों में निवेश को प्रोत्साहित करने में साझा रुचि दिखाई गई.

शिखर सम्मेलन में डिजिटलीकरण पर, चर्चा करते हुए प्रधानमंत्रियों ने कहा कि प्रौद्योगिकी बेहतर और अधिक सार्थक जीवन में योगदान दे सकती और साझा वैश्विक चुनौतियों को हल करने में सहायता कर सकती है, नॉर्डिक देश अधिक समावेशी, टिकाऊ और मानव केन्द्रित तकनीकी विकास के लिए संलग्न और काम करना जारी रखना चाहते हैं. नेताओं ने कहा कि डिजिटल इंडिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध कराई गई सरकारी सेवाओं का एक अच्छा उदाहरण है. मेड इन इंडिया जैसी पहलों के अनुरूप नॉर्डिक सहयोग डिजिटलीकरण के प्रयासों का समर्थन करती है, सम्मेलन में कहा गया कि सभी प्रधानमंत्री ध्रुवीय क्षेत्रों में अनुसंधान, जलवायु और पर्यावरणीय मुद्दों पर आर्कटिक क्षेत्र में 

सहयोग बढ़ाने के अवसरों को देखते हैं. प्रधानमंत्री इस बात पर सहमत हुए कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी नवाचार, आर्थिक विकास, जलवायु अनुकूलन समाधान और पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार और निवेश में बढ़ावा देने में मदद कर सकती है. शिखर सम्मेलन ने उन सभी क्षेत्रों में जहाँ भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग का विस्तार हो रहा है शिक्षा, संस्कृति, श्रम गतिशीलता और पर्यटन के माध्यम से लोगों के बीच मजबूत सम्पर्क स्थापित किए जाने के महत्व पर जोर दिया. 

नॉर्डिक देश : एक परिचय । 

नॉर्डिक देश यूरोप और उत्तरी अटलांटिक में फैले हुए एक भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में विद्यमान हैं. नॉर्डिक देशों में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन आदि 5-5 सम्प्रभु देश शामिल हैं, साथ ही नॉर्डिक देशों के साथ कुछ स्वायत्त व अन्य क्षेत्र भी सम्बद्ध हैं, जिसमें डेनमार्क के अन्दर स्वायत्त द्वीप समूह फरो आइसलैंड व ग्रीनलैंड, फिनलैंड की अधिकारिता वाला स्वायत्त क्षेत्र अलान्द तथा नॉर्वे के अनिगमित क्षेत्र जन मायेन व स्वालबार्ड तथा नॉर्वे पर निर्भर बुवेट द्वीप तथा अंटार्कटिक में नॉर्वे के दावे वाले पीटर आई आइसलैंड व क्वीन मौड लैंड के क्षेत्र शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि नॉर्वे, स्वीडन व डेनमार्क स्कैंडिनेवियाई देश के रूप में भी जाने जाते हैं.नॉर्वे को छोड़कर चार देशों की प्रधानमंत्री महिला हैं. इतिहास में इन देशों के निवासियों को वाइकिंग्स के नाम से जाना जाता रहा है, 8वीं से 11वीं सदी के बीच इन वाइकिंग्स की पहचान एक खतरनाक लुटेरों के रूप में होती थी, वाइकिंग्स जहाज और बड़ी नावों को बनाने की कला में माहिर थे. उनकी सेना में महिलाएं भी योद्धा के रूप में होती थीं और आज भी नॉर्डिक देशों में महिलाएं पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं हैं, आज 5 में से 4 देशों में शासन की शक्ति महिलाओं के हाथ में है, यद्यपि इनका इतिहास लुटेरों का था, किन्तु आज ये नॉर्डिक देश दुनिया के सबसे अधिक सुशासित एवं खुशहाल देश है. 

नॉर्डिक देश दुनिया के सबसे समृद्ध और खुशहाल देश माने जाते हैं. ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स 2022’ में नॉर्डिक देश शीर्ष 10 देशों की सूची में शामिल हैं. फिनलैंड लगातार 5वें वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश चुना गया है और डेनमार्क दूसरे स्थान पर है, जबकि 2016 में वह पहले स्थान पर था. इन देशों में जीवन की गुणवत्ता का स्तर अत्यधिक उच्च है यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सेवाएं असाधारण हैं.शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाएं या तो सरकार की तरफ से एकदम मुफ्त या बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं, सुरक्षा के बेहतर प्रबन्ध, अच्छी पुलिसिंग सिस्टम, मानवाधिकार की बेहतर निगरानी, उच्च आय, कम भ्रष्टाचार, और मजबूत कानून व्यवस्था यहाँ के लोगों की जिंदगी में खुशहाली को बढ़ाते हैं, यहाँ के लोग ईमानदार, शांतिप्रिय और भरोसेमंद हैं. नॉर्डिक देशों में भ्रष्टाचार का स्तर बहुत कम है. डेनमार्क विश्व का सबसे कम भ्रष्टाचार वाला देश है. 

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