हृदय योजना पर निबंध | Drishti ias essay

हृदय योजना पर निबंध

हृदय योजना पर निबंध | Drishti ias essay

किसी भी देश की संस्कृति एक दिन में विकसित नहीं होती। संस्कृति, जो कि संस्कारों का ही घनीभूत स्वरूप होती है, का विकसित होने में सैकड़ों-हजारों वर्ष लग जाते हैं। हमारी संस्कृति हमारे लिए अत्यंत मूल्यवान होती है, क्योंकि इससे हमारी अस्मिता जुड़ी होती है और हमारी रवायतें, रीति-रिवाज, पहनावा, शिल्प, लोक-रंग आदि इसके घटक होते हैं। हमारे शहर हमारी संस्कृति को बयां करते हैं और हमारे लिए धरोहर जैसे होते हैं। हम अपनी संस्कृति से प्यार करते हैं और हमारा यह दायित्व भी बनता है कि हम अपने सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर, संभाल कर रखें और उसके संवर्धन के यथेष्ट प्रयास करें। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो ऐसे में हमारी सांस्कृतिक विरासतें और धरोहरें दम तोड़ देंगी और वे पुनर्जीवित नहीं हो सकेंगी। यह सुखद है कि ‘हृदय योजना’ के माध्यम से हमारी केंद्र सरकार सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने को तत्पर दिख रही हैं। 

केंद्र सरकार द्वारा 21 जनवरी, 2015 को ‘राष्ट्रीय विरासती शहर विकास एवं संवर्धन योजना’ (Heritage City Development and Augmentation Yojana : HRIDAY) का शुभारंभ किया गया, जिसका मुख्य मकसद देश की सांस्कृतिक विरासतों को संरक्षित और पुनर्जीवित करना है। सरकार की इस महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत देश के चुनिंदा हेरिटेज (विरासत) शहरों का समेकित विकास किया जाना है, ताकि ये संरक्षित और जीवंत बने रहकर उन लोगों को आकर्षित कर सकें, जो भारतीय संस्कृति से लगाव रखते हैं। इस योजना का क्रियान्वयन शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा तथा पहले चरण के लिए मंत्रालय द्वारा जिन शहरों को समेकित रूप से विकसित करने के लिए चुना गया है, वे हैं-वाराणसी, अमृतसर, गया, अजमेर, मथुरा, कांचीपुरम, वेलंकनी (वेल्लनकिनि), बादामी, अमरावती, वारंगल, पुरी तथा द्वारका। ध्यातव्य है कि प्रथम चरण के लिए चयनित ये सभी शहर सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं तथा भारतीय संस्कृति के केंद्र-बिंदु हैं। इन 12 शहरों के लिए 500 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई है। शहरवार आबादी को आधार बनाकर धनराशि का निर्धारण किया गया है। 

हृदय योजना पूर्णतः केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित होगी तथा । इसके तहत चुने हुए विरासत स्थलों के आस-पास बुनियादी संरचना । और सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। इस योजना के तहत जहां विरासत स्थलों के एकीकृत, समावेशी और सतत विकास को प्रोत्साहन प्रदान किया जाना है, वहीं स्मारकों आदि के रख-रखाव और देख-भाल पर विशेष ध्यान दिया जाना है। साथ ही संपर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का उन्नत बनाने की भी योजना है। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें शामिल किए गए शहरों के नागरिकों, पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायों समेत पूरे ‘इको सिस्टम’ को बढ़ावा दिया जाएगा। 

योजना के क्रियान्वयन में धन की कमी न आए, ऐसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। शहरों की जनसंख्या के आधार पर चयनित 12 शहरों को पर्याप्त धन मुहैया कराया गया है तथा व्यय के लिए मंजी-पत्र भी जारी किए गए हैं। आबादी के आधार पर सर्वाधिक धन वाराणसी को (89.31 करोड़ रुपए) आवंटित किए गए हैं। अमृतसर को 61.39 करोड़ रुपए, वारंगल को 40.54 करोड़ रुपए, अजमेर को 40.04 करोड़ रुपए, गया को 40.04 करोड़ रुपए, मथुरा को 40.04 करोड़ रुपए, कांचीपुरम को 23.04 करोड़ रुपए, वेलंकनी (वेल्लनकिनि) को 22.26 करोड़ रुपए, अमरावती को 22.26 करोड़ रुपए, बादामी को 22.26 करोड़ रुपए, द्वारका को 22.26 करोड़ रुपए तथा पुरी को 22.54 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए इस योजना के तहत 423.27 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। 

यकीनन हृदय योजना बहुत उपयोगी है। इससे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तो संरक्षण मिलेगा ही, पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। विरासत शहर जब समेकित रूप से विकसित होंगे, तो उनके प्रति देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा और वे इन्हें देखने के लिए खिंचे चले आएंगे। इससे पर्यटन उद्योग को बल मिलेगा और राजस्व में वृद्धि होगी। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, तो लोग भारत के सांस्कृतिक महत्त्व को समझ सकेंगे। विरासत शहर उन्हें भारतीय संस्कृति की जीवंत अनुभूति कराएंगे। 

हृदय योजना के रूप में एक नेक पहल की गई है। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजना, संवारना, संभालना, संजोना एवं संरक्षित रखना हमारा नैतिक दायित्व बनता है। ऐसा करके ही | हम गौरव की अनुभूति कर सकते हैं। इस योजना के रूप में हमने अपनी संस्कृति के मर्म को समझा है। अपनी अनमोल विरासत को पुनर्जीवित कर उसे जीवंत और आकर्षक बनाने की पहल की है। यकीनन यह पहल स्वागत योग्य है। 

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