सोलह दाँतो वाला राजा

बच्चों की कहानियाँ- सोलह दाँतो वाला राजा

बच्चों की कहानियाँ- सोलह दाँतो वाला राजा

कोरिया में सैकड़ों वर्ष पहले शीलवान नाम का राजा था। वह बड़ा बुद्धिमान था । बहादुर था। जनता की खुशी को अपनी खुशी मानता था। जनता को सुखी बनाने में दिन-रात लगा रहता था। 

राजा काफी बूढा था। एक दिन बीमार हआ। बहत बीमार। बचने की आशा न रही। यह देख कर परिवार वाले और मंत्रीगण इकट्ठे हो गए। उन्होंने राजा की अंतिम इच्छा जाननी चाही। राजा चुप रहा। राजकुमार को लोगों ने संकेत किया। वह पिता के चरणों के पास पहुँचा। राजा अपलक नेत्रों से राजकुमार को देखने लगा। राजकुमार हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। राजा ने कहा – “मेरी बात मानोगे?” 

राजकुमार ने सिर झुका कर कहा – “पुत्र पिता की आज्ञा का पालन नहीं करेगा, तो कौन करेगा? आप आदेश दीजिए।” 

राजा प्रसन्न हो गया। उसने पास बैठे दामाद की ओर देखा। फिर राजकुमार से पूछा – “मेरे कहने से गद्दी छोड़ सकते हो?” 

राजकुमार पिता की अंतिम इच्छा सुनते ही प्रसन्न हो गया। “क्यों नहीं? आप जैसा चाहेंगे, वैसा ही करूँगा।” 

सुनते ही लोग सन्न रह गए। यह सुनकर दामाद भी प्रसन्न नहीं हुआ। उसका चेहरा लटक गया, मगर राजकुमार ने उत्साह से कहा – “पिता जी, मैं राज्य नहीं लूंगा। आपके आदेश का पालन करूँगा।” राजा पुलकित हो गया। उसने अंतिम सांस ली और शरीर का त्याग कर दिया। 

राजा का अंतिम संस्कार किया गया। राजधानी में कई दिन तक शोक मनाया गया। इसके बाद एक दिन राजकुमार ने अपने बहनोई से कहा – “पिता जी की आज्ञा का पालन करना Tऔर आपका कर्तव्य है। आप सिंहासन पर बैठिए।” बहनोई ने सिर हिलाते हुए कहा – “नहीं, राज्य आपका है। आप युवराज हैं।” 

राजकुमार ने उत्तर दिया – “पिता जी ने आपको मुझसे योग्य समझकर ही जनता की भलाई के लिए राज्य दिया है। अब आप ही राज्य कीजिए।” बहनोई ने जोर देकर कहा – “राज्य आपका है। मैं राज्य नहीं लूंगा।” 

राजकुमार बोला- “मगर मैं पिता जी के वचन का पालन करूँगा। राज्य आप ही करेंगे। मैंने उसका त्याग कर दिया है। मैं वचन से पीछे कैसे हट जाऊँ?” 

दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे। परिणाम यह हुआ कि बहुत दिनों तक सिंहासन खाली पड़ा रहा। मंत्री लोग राज्य चलाते रहे। 

यह स्थिति अधिक दिन तक नहीं चल सकती थी। लेकिन सिंहासन पर बैठे कौन? यही सवाल था। राजकुमार पिता के आदेश पर दृढ़ था। दामाद दूसरे के हक को नहीं लेना चाहता था। सभी ने समझाया, लेकिन फिर भी दोनों में से कोई तैयार न हुआ। 

बिना राजा के शासन चल नहीं सकता था। मंत्रियों ने जनता से सलाह की और एक उपाय निकाला। राज्य में घोषणा की गई – “जिस व्यक्ति के ऊपर के जबड़े में सोलह दाँत होंगे, उसी को राजा बनाया जाएगा।” 

सभी ने अपने-अपने दाँत देखे, मगर सोलह दाँतों वाला कोई भी न था। संयोग की बात थी कि राजा का दामाद ही सोलह दाँतों वाला निकला। यह देख, राजकुमार पिता जी की बात का राज समझ गया। वह सोचने लगा – “पिता जी ने सोच-समझकर ही फैसला किया था।” 

राजा का दामाद प्रसन्न नहीं था, मगर जनता के आगे उसे झुकना पड़ा। वह धूमधाम से सिंहासन पर बैठा। राजकुमार ने तिलक लगाकर अपने बहनोई को राजा घोषित किया और स्वयं राज्य त्याग कर चला गया। 

तभी से कोरिया में कहावत मशहूर हो गई – “जिस आदमी के ऊपर के जबड़े में सोलह दाँत होते हैं, वह बुद्धिमान, साहसी और वीर होता है।

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